

बिलासपुर। शहर में इन दिनों बड़ी संख्या में वाहन चालकों के मोबाइल पर ओवरस्पीड के ई-चालान पहुंच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकांश लोगों को यह तक जानकारी नहीं है कि उन्होंने कब और कहां गति सीमा का उल्लंघन किया। चालान मिलने के बाद लोग ट्रैफिक थाना और इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) सेंटर पहुंचकर कारण जानने और आपत्ति दर्ज कराने को मजबूर हैं।
दरअसल, शहर के 22 प्रमुख स्थानों पर लगाए गए ऑटोमैटिक स्पीड डिटेक्शन कैमरे निर्धारित सीमा से अधिक गति से चलने वाले वाहनों का स्वतः ई-चालान जनरेट कर रहे हैं। शहरवासियों के साथ-साथ दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले वाहन चालक भी इस व्यवस्था से अनजान हैं। ऐसे में अनजाने में ही वे गति सीमा का उल्लंघन कर बैठते हैं और कैमरों की निगरानी में उनका चालान कट जाता है।
40 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा, लेकिन जानकारी का अभाव
शहर के भीतर वाहनों के लिए अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा निर्धारित है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि इस नियम की कभी व्यापक जानकारी नहीं दी गई। सबसे बड़ी समस्या यह है कि शहर की अधिकांश सड़कों, चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर स्पीड लिमिट दर्शाने वाले बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं।
वाहन चालकों का कहना है कि यदि शहर में गति सीमा लागू की गई है तो उसके अनुरूप संकेतक और सूचना बोर्ड भी लगाए जाने चाहिए थे, ताकि लोग नियमों से अवगत हो सकें। बिना पर्याप्त जानकारी के सीधे ई-चालान भेजे जाने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
बड़ा सवाल- बोर्ड नहीं तो नियम कैसे जानें?
शहरवासियों का कहना है कि किसी भी शहर में गति सीमा लागू करने के साथ-साथ उसका व्यापक प्रचार-प्रसार और सड़क किनारे स्पष्ट साइनेज लगाना आवश्यक होता है। लेकिन बिलासपुर में अधिकांश स्थानों पर न तो प्रवेश बिंदुओं पर स्पीड लिमिट लिखी गई है और न ही चेतावनी संबंधी संकेतक लगाए गए हैं।
इसी कारण अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा कब तय की गई और इसकी जानकारी नागरिकों तक पहुंचाने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए।
सिग्नल बंद रहने पर भी कट रहे चालान
कई वाहन चालकों ने बताया कि सुबह के समय अधिकांश ट्रैफिक सिग्नल बंद रहते हैं। ऐसे में उन्हें लगता था कि उस दौरान किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन कुछ दिनों बाद मोबाइल पर ई-चालान का संदेश पहुंच जाता है। शुरुआत में लोग इसे रेड सिग्नल जंपिंग का मामला समझते हैं, लेकिन ट्रैफिक थाना या आईटीएमएस सेंटर पहुंचने पर पता चलता है कि चालान ओवरस्पीड का है।
सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने चालान की जानकारी लेने ट्रैफिक थाना और आईटीएमएस कार्यालय पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें समझाया जा रहा है कि चालान निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में वाहन चलाने के कारण जारी किया गया है।
ट्रैफिक पुलिस ने निगम को भेजा प्रस्ताव
जानकारों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शहर में 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि स्पीड लिमिट बोर्ड नहीं होने के कारण पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक ट्रैफिक पुलिस ने नगर निगम को कई बार प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर स्पीड लिमिट के संकेतक लगाने के लिए पत्र भेजा है, लेकिन अब तक अधिकांश स्थानों पर बोर्ड नहीं लगाए जा सके हैं।
स्कूल और अस्पतालों के सामने 20 किलोमीटर प्रति घंटा होगी सीमा
यातायात विभाग भविष्य में स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के सामने वाहनों की अधिकतम गति सीमा 20 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित करने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
क्या कहते हैं एएसपी ट्रैफिक
एएसपी (ट्रैफिक) रामगोपाल करियारे ने बताया कि सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आईटीएमएस के माध्यम से ओवरस्पीड वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। शहर के विभिन्न स्थानों पर स्पीड डिटेक्शन कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्पीड लिमिट संबंधी साइन बोर्ड लगाने के लिए नगर निगम को पत्र भेजा गया है और जल्द ही प्रमुख मार्गों पर संकेतक लगाए जाएंगे। साथ ही वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की गई है।
