
बिलासपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण में संभावित गड़बड़ियों को लेकर खाद्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। शहर की 163 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में से 99 दुकानों में अप्रैल माह के दौरान 10 से 57 प्रतिशत तक राशन का वितरण बायोमेट्रिक सत्यापन के बजाय ओटीपी के माध्यम से किए जाने का खुलासा हुआ है। इनमें कुछ दुकानें राजनीतिक दलों के नेताओं और राशन दुकान विक्रेता संघ के पदाधिकारियों से जुड़ी बताई जा रही हैं।
केंद्र सरकार ने अप्रैल माह में तीन माह का राशन एक साथ वितरित किए जाने के दौरान गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके बाद खाद्य विभाग ने उन सभी दुकानों की जांच के निर्देश दिए हैं, जहां 10 प्रतिशत से अधिक राशन ओटीपी के माध्यम से वितरित किया गया।
खाद्य संचालनालय ने जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी कर रिपोर्ट 25 जून तक भेजने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण न हो पाने के पीछे क्या कारण थे। अधिकारियों को पंचनामा तैयार कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने कहा गया है।
खाद्य संचालक फरिहा आलम सिद्दीकी ने मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2016 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ओटीपी के माध्यम से राशन वितरण पाए जाने पर संबंधित दुकान संचालक के साथ-साथ क्षेत्रीय सहायक खाद्य अधिकारी और खाद्य निरीक्षक के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रभारी खाद्य नियंत्रक राजीव लोचन तिवारी ने बताया कि जिन दुकानों में 10 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न वितरण ओटीपी के माध्यम से हुआ है, वहां खाद्य निरीक्षकों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग और बुजुर्ग हितग्राहियों को छोड़कर अन्य किसी को भी ओटीपी के माध्यम से राशन वितरण नहीं किया जाना चाहिए।
खाद्य विभाग की इस कार्रवाई से राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कई राशन दुकानों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
