
बिलासपुर। सरकारी मुआवजा प्राप्त करने के लिए परिजनों की सामान्य मौत को सर्पदंश से हुई मौत बताकर 8 लाख रुपये की शासकीय राशि हड़पने का मामला सामने आया है। विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद प्रशासन ने जांच कराई, जिसमें फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर तोरवा पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का अपराध दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार विधानसभा में सवाल उठने के बाद कलेक्टर और एसडीएम राजस्व ने संदिग्ध सर्पदंश मुआवजा मामलों की जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान बिलासपुर अनुभाग के 15 मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें ग्राम महमंद के दो मामले प्रमुख पाए गए।
जांच में पता चला कि ग्राम महमंद निवासी संतोष कुमार सूर्यवंशी ने अपनी पत्नी लता सूर्यवंशी की सामान्य मृत्यु को सर्पदंश से हुई मौत दर्शाकर शासन से 4 लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त किया था। इसी प्रकार सफीना बानो ने अपने पति निसार खां की मृत्यु को सर्पदंश से होना बताकर 4 लाख रुपये की सहायता राशि हासिल की थी।
प्रशासनिक जांच में दोनों मामलों में वास्तविक मृत्यु के कारण को छिपाने तथा फर्जी पंचनामा एवं मेडिकल दस्तावेज तैयार कर मुआवजा लेने की पुष्टि हुई। इसके बाद तहसीलदार के निर्देश पर नायब नाजीर दौलत राम ठाकुर ने तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है।
अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
तोरवा थाना प्रभारी रजनीश सिंह ने बताया कि मामले में केवल आवेदकों की ही नहीं, बल्कि राजस्व एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। किसी भी सर्पदंश मृत्यु प्रकरण में पटवारी का पंचनामा, कोटवार की रिपोर्ट तथा सरकारी चिकित्सक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। ऐसे में बिना विभागीय स्तर पर मिलीभगत के मुआवजा स्वीकृत होना संभव नहीं लगता।
पुलिस अब संबंधित पटवारी, कोटवार, चिकित्सक तथा अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
