
बिलासपुर। शहर और राजमार्गों पर घूमने वाले आवारा एवं निराश्रित मवेशियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन में जिला प्रशासन, नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग ने संयुक्त रूप से अभियान को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। अब सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग या राज्य मार्ग पर पाए जाने वाले गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं को स्थायी रूप से जब्त किया जाएगा।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पशुपालकों, डेयरी संचालकों और किसानों से अपने पशुओं को घर अथवा निर्धारित स्थानों पर सुरक्षित रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पशुओं को सार्वजनिक सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य मार्गों पर खुला छोड़ना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
नगर निगम द्वारा सड़कों और राजमार्गों से पकड़े गए मवेशियों को मोपका स्थित पशु आश्रय केंद्र में रखा जाता है। यहां से चयनित पशुओं को गौ-इकाई अथवा बैलजोड़ी इकाई के रूप में जरूरतमंद किसानों को सौंपा जाता है।
प्रशासन के अनुसार कई पशुपालक जुर्माना भरकर अपने पशुओं को छुड़ा लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें फिर सड़कों पर छोड़ देते हैं। इस समस्या को देखते हुए अब कठोर कदम उठाने का फैसला किया गया है। नए निर्देशों के तहत यदि कोई पशु सड़क या राजमार्ग पर पाया जाता है तो उसे स्थायी रूप से जब्त कर गौशालाओं, गौठानों अथवा जरूरतमंद किसानों को पालन के लिए सौंप दिया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक बार जब्त किए गए पशुओं पर किसी भी प्रकार की दावा-आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने पशुपालकों से नियमों का पालन करने और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने की अपील की है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं और यातायात बाधाओं को रोका जा सके।
