
बिलासपुर। अब तक भेड़, बकरी, घोड़े और ऊंट जैसे पशु ही सरकारी योजनाओं और अनुदान के दायरे में आते थे, लेकिन अब गधा पालन को भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) में शामिल कर लिया गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले से गधा पालन को बढ़ावा मिलेगा और पशुपालकों को व्यवसाय शुरू करने के लिए 50 प्रतिशत तक की कैपिटल सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन का उद्देश्य पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना, पशुजन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करना है। गधा पालन को योजना में शामिल करने के पीछे गधों की तेजी से घटती आबादी को बचाने और इसे आजीविका के नए साधन के रूप में विकसित करने की मंशा है।
पशुपालन विभाग के अनुसार, 20वीं पशुगणना में देशभर में गधों की संख्या में लगभग 61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। छत्तीसगढ़ में भी गधों की संख्या लगातार घट रही है और अब यह पशु केवल कुछ पारंपरिक कार्यों तक सीमित होकर रह गया है। वर्तमान में राज्य के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे कुछ जिलों में ही गधे दिखाई देते हैं।
हालांकि बिलासपुर जिले में गधों की संख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। 21वीं पशुगणना की तुलनात्मक रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्ष पहले जिले में गधों की संख्या 10 थी, जो अब बढ़कर 19 हो गई है।
योजना के तहत पात्र पशुपालकों को सब्सिडी दो किस्तों में प्रदान की जाएगी। पहली किस्त परियोजना स्वीकृत होने के बाद जारी होगी, जबकि दूसरी किस्त परियोजना पूर्ण होने और भौतिक सत्यापन के बाद दी जाएगी।
पशुपालन विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. एस.एस. तंवर ने बताया कि अब तक भेड़, बकरी, घोड़ा और ऊंट पालन पर ही अनुदान दिया जाता था, लेकिन जल्द ही गधा पालन करने वाले पशुपालकों को भी सरकारी सहायता और सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे गधों की घटती संख्या को रोकने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
