
यूनुस मेमन

रतनपुर। धार्मिक नगरी रतनपुर स्थित बिकमा तालाब के समीप एक गड्ढे में मगरमच्छ द्वारा दिए गए अंडों से निकले छह नवजात शावकों का शुक्रवार सुबह सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। स्थानीय नागरिकों की सतर्कता, रतनपुर पुलिस एवं वन विभाग की त्वरित कार्रवाई के चलते इन दुर्लभ वन्यजीवों को सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास खुटाघाट बांध में छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार सुबह तालाब में स्नान करने पहुंचे लोगों ने तालाब के बाहरी हिस्से में स्थित एक गड्ढे में मगरमच्छ के छह नवजात बच्चों को देखा। अचानक इतने छोटे मगरमच्छों को देखकर लोगों ने इसकी सूचना तत्काल रतनपुर थाना एवं वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही रतनपुर पुलिस मौके पर पहुंची तथा क्षेत्र के पार्षद मनोज कुमार पाटले भी घटनास्थल पर उपस्थित रहे।
पुलिस और स्थानीय लोगों के सहयोग से नवजात मगरमच्छों को सुरक्षित रूप से वन विभाग के कार्यालय पहुंचाया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने सभी छह शावकों को उनके प्राकृतिक आवास खुटाघाट बांध में छोड़ दिया, जहां मगरमच्छों की बड़ी संख्या निवास करती है।
बताया जाता है कि रतनपुर के समीप स्थित खुटाघाट बांध मगरमच्छों का प्रमुख आवास क्षेत्र है। प्रजनन काल के दौरान कई बार मादा मगरमच्छ सुरक्षित स्थान की तलाश में आसपास के तालाबों और जलाशयों तक पहुंच जाती हैं तथा वहीं अंडे देती हैं। इसी क्रम में बिकमा तालाब के निकट भी मगरमच्छ ने अंडे दिए थे, जिनसे हाल ही में छह बच्चों का जन्म हुआ।

वन्यजीव जानकारों के अनुसार नवजात मगरमच्छों के लिए शुरुआती समय बेहद संवेदनशील होता है। यदि समय रहते इन बच्चों को सुरक्षित नहीं किया जाता, तो उनके जीवन पर खतरा मंडरा सकता था। वहीं बड़े होने पर इनके आसपास के तालाबों में फैल जाने की संभावना भी रहती, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती थीं।
स्थानीय नागरिकों की जागरूकता और प्रशासन की तत्परता से न केवल दुर्लभ वन्यजीवों के जीवन की रक्षा हुई, बल्कि संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति को भी टाल दिया गया। इस सफल रेस्क्यू अभियान की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर स्वयं हस्तक्षेप न करें तथा तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दें, ताकि वन्यजीवों और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
