बैल के हमले में एक आंख खोने से परेशान चिकित्साकर्मी ने फांसी लगाकर दी जान

शशि मिश्रा

तखतपुर

बैल के हमले से एक आंख की रोशनी खोने से परेशान युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक अपनी आंख के इलाज के लिए कई डाक्टरों के पास गया, लेकिन उसे कोई फायदा नहीं हुआ। इससे परेशान होकर युवक ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली।

जानकारी के अनुसार बेलसरी निवासी दीपक कुमार पांडेय पिता राजकुमार पाण्डेय तखतपुर स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्निशियन के पद पर कार्यरत था। लगभग एक साल पहले बेलसरी में पैदल अपने घर जा रहा था तभी एक बैल ने

दीपक कुमार पाण्डेय को पीछे से उठाकर पटक दिया था। इससे पहले कि दीपक संभल पाता बैल ने उसे सिंग से उठाकर एक बार फिर पटक दिया। जब बैल ने दीपक को सिंग से उठाया तब सिंग दीपक की एक आंख में घुस गया था। शोर सुनकर गांव वाले वहां आए और किसी तरह बैल को भगाया। ग्रामीणों ने दीपक को इलाज के लिए तत्काल बिलासपुर भेजा, लेकिन बिलासपुर के नेत्र चिकित्सकों ने जवाब दे दिया। इसके बाद दीपक चेन्नई और हैदराबाद भी गया पर दीपक की आंखों की रोशनी वापस नहीं आ पाई। दीपक एक आंख से जीवनयापन कर रहा था, पर इस दुर्घटना के बाद से उसके शरीर के अन्य अंगों में भी तकलीफ बढ़ती जा रही थी। पिछले कुछ दिनों से उसकी दूसरी आंख में तकलीफ बढ़ने लगी थी। शारीरिक रूप से परेशान दीपक शाम को अपने कमरे में आराम करने चला गया। रात में जब खाने के लिए वह नीचे नहीं आया तो उसकी मां बुलाने के लिए ऊपर गई। मांग ने दरवाजा खोलकर देखा तो अपने बेटे दीपक को फांसी के फंदे में लटका हुआ पाया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तब उसकी जेब से सुसाइड नोड मिला जिसमें उसने फांसी लगाने का कारण शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होना बताया। शव परिजनों को पोस्टमार्टम उपरांत सौंप दिया।

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