

बिलासपुर। ग्रीष्म ऋतु के विशेष धार्मिक पर्व आम्र कुंज उत्सव का आयोजन मंगला स्थित मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर हरे कृष्ण महामंत्र, हरिनाम संकीर्तन और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। भगवान के दर्शन और आम के प्रसाद ग्रहण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
उत्सव के दौरान भगवान , भ्राता और बहन महारानी को 10 प्रकार के करीब 500 किलो आमों का विशेष भोग अर्पित किया गया। अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, चौसा और सफेदा सहित विभिन्न प्रसिद्ध किस्मों के आमों से भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया। आमों से सजे दरबार के दर्शन के लिए दिनभर भक्तों की भीड़ उमड़ी रही।
कार्यक्रम राधा द्वितीय दास प्रभु के सानिध्य और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने आम्र कुंज उत्सव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति से प्राप्त श्रेष्ठ फल भगवान को अर्पित करना सनातन संस्कृति की प्राचीन परंपरा है। श्रद्धा और समर्पण के साथ अर्पित किया गया पत्ता, पुष्प, फल या जल भी भगवान को प्रिय होता है।
उन्होंने बताया कि भगवान का आम के फल से विशेष लगाव माना जाता है, इसलिए आम्र कुंज उत्सव का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। आयोजन में हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और आम प्रसाद वितरण भी किया गया।
उत्सव को सफल बनाने में जुगल किशोर दास, आदि केशव दास, महात्मा प्रिया दास, आशीष अग्रवाल, प्रशांत अग्रवाल, डॉ. अनिरुद्ध कौशिक, डॉ. विष्णुकांत दुबे सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
