
शशि मिश्रा

बिलासपुर। रेलवे स्टेशन पर आधुनिकीकरण और नई ठेकेदारी व्यवस्था ने सालों से यात्रियों की सेवा में लगे कुलियों को भुखमरी के कगार पर ला खड़ा किया है। रेलवे स्टेशन पर एक तरफ जहां यात्रियों की सुविधा के लिए नई तकनीके आ रही हैं वहीं दूसरी तरफ इन बंदोबस्तों ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले कुलियों का रोजगार पूरी तरह छीन लिया। स्टेशन पर कुलियों के पास दिनभर में एक-दो फेरों का काम मिलना भी मुश्किल हो चुका है, जिससे उनके सामने परिवार पालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
स्टेशन के विकास और यात्रियों की सहूलियत के लिए प्लेटफार्मों पर लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियां और ई चालक जैसे आधुनिक सुविधाएं शुरू की गई है। इन तकनीकी बदलावों का सबसे सीधा असर कुलियों के काम पर पड़ा है। अब स्टेशन आने वाले यात्री भारी सामान होने पर कुलियों की मदद लेने के बजाय खुद ही लिफ्ट या एक्सलेटर से प्लेटफार्म तक पहुंच जाते हैं। काम न मिलने की वजह से स्टेशन पर
पैकेजिंग के टेंडर ने छीना रोजगार
पहले कुलियों की कमाई का बहुत बड़ा जरिया दो-पहिया वाहनों की पैकेजिंग और पार्सल लोडिंग हुआ करता था। यात्री जब पार्सल काउंटर पर वाहन की बुकिंग कराने जाते थे तो कुली ही उसकी सुरक्षित पैकेजिंग करते थे। इसके बदले कुली यात्रियों से 200 से 300 रूपया लिया करते थे जिससे उनका अच्छा खासा खर्च निकल जाता था। अब रेलवे पार्सल की पैकेजिंग को पूरी तरह निजी ठेकेदारों काके हवाले कर टेंडर सिस्टम कर दिया है। इस नई व्यवस्था से अब वही पैकेजिंग 550 रूपए में की जा रही है। यानी ठेकेदारी प्रथा लागू होने के बाद यात्रियों की जेब पर दोगुना आर्थिक बोझ बढ़ गया है वही दूसरी तरफ कुलियों के हाथ से यह पैकेजिंग का पारंपरिक रोजगार भी हमेशा के लिए छीन लिया गया है।
कुलियों का समूह खाली बैठा रहता है। इस सबंध में कुली का काम करने वाले जय का कहना है कि अब बेहद मुश्किल से अपना घर चला पा रहे है। काम पूरी तरह ठप होने के कारण मेरे सारे साथी सुबह से शाम तक स्टेशन पर बैठने को मजबूर हैं।
गर्मी में ट्रेनें कैंसिल होने से बड़ी आफत
रेलवे द्वारा कुछ गाडियों को कैंसिल किए जाने से इस गर्मी के सीजन में जब यात्रियों की संख्या बढ़ने से अच्छी अच्छी कमाई की उम्मीद थी थी तब मुख्य रूट की ट्रेने कैसिल होने से स्टेशन पर सन्नाटा पसरा हुआ है। पार्सल का काम अब पूरी तरह से ठेकेदारों के कर्मचारियों के पास चला गया है जिसके चलते कुलियों पार्सल लोडिग-अनलोडिग का काम नहीं मिल रहा है। कुली संदीप मनहार ने अपना दर्द बताते हुए बताया। कि हालात इतने बदतर हो चुके है कि कई दिन तो हमें बिना एक रूपया की कमाई किए ही खाली हाथ ही घर वापिस जाना पड़ता है। संकट के इस दौर में हमे सरकार और रेलवे प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है।
