

केरल। राज्य में डेढ़ साल के मासूम अरशद की मौत ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। बच्चे की मौत के बाद सामने आई जानकारियों और मेडिकल जांच के निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि बच्चे की मां के साथ रह रहा उसका बॉयफ्रेंड लंबे समय से मासूम के साथ क्रूरता कर रहा था, जबकि मां सब कुछ जानने के बावजूद चुप रही।
करीब दो सप्ताह पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें अरशद के दोनों हाथ टूटे हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो में उसकी मां अखिला लोगों को यह बताती नजर आ रही थी कि बच्चा साइकिल से गिर गया था, जिसके कारण उसके हाथों में चोट आई। उस समय इस दावे पर ज्यादा सवाल नहीं उठे, लेकिन बच्चे की मौत के बाद पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया।
जानकारी के अनुसार, अरशद के जैविक पिता अखिल का निधन तब हो गया था जब उसकी मां तीन महीने की गर्भवती थी। इसके बाद अखिला अपने बॉयफ्रेंड मोहम्मद अश्कर के साथ रहने लगी। इसी दौरान मासूम बच्चे के साथ लगातार शारीरिक प्रताड़ना की जाती रही।
डॉक्टरों और जांच से जुड़ी रिपोर्टों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के शरीर पर 51 अलग-अलग चोटों के निशान पाए गए। उसके निजी अंगों पर भी गंभीर चोटें थीं। पैरों पर सिगरेट से जलाए जाने जैसे निशान मिले, जबकि लगातार मारपीट के कारण अंदरूनी रक्तस्राव और पुरानी हड्डियों के टूटने के संकेत भी सामने आए।
बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोग मासूम के साथ हुई क्रूरता पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।
मामले में सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि यदि बच्चे के साथ लंबे समय से अत्याचार हो रहा था, तो समय रहते उसकी सुरक्षा के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि बच्चे को चोटें किन परिस्थितियों में पहुंचीं और मां की भूमिका क्या रही।
पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्टों तथा संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मासूम अरशद की मौत ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, घरेलू हिंसा और बाल संरक्षण तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। समाज के विभिन्न वर्गों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की है।
