
बिलासपुर। साइबर ठगों ने जिला न्यायालय में पदस्थ एक स्टेनोग्राफर को पुराने दोस्त बनकर फोन किया और विश्वास में लेकर 65 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठग ने फर्जी बैंक मैसेज भेजकर रकम खाते में आने का झांसा दिया, जिसके बाद पीड़ित ने अपने खाते से रकम ट्रांसफर कर दी। मामले में सिविल लाइन पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार मंगला स्थित गीतांजली पार्क निवासी मनोज चतुर्वेदी (58) जिला न्यायालय में स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं। 25 मई की शाम करीब 5:43 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को उनका पुराना मित्र बताया और उसी की तरह आवाज में बात कर विश्वास जीत लिया।
ठग ने मनोज से कहा कि कांकेर के एक व्यक्ति ने उसे पुराने उधार के 65 हजार रुपये लौटाए हैं, लेकिन उसका बैंक खाता मोबाइल नंबर से लिंक नहीं है। इसलिए वह रकम मनोज के खाते में भेज रहा है। उसने कहा कि रकम आने के बाद उसे दूसरे नंबर पर ट्रांसफर कर देना।
फोन पर लगातार बातचीत करते हुए ठग ने पीड़ित को उलझाए रखा। इसी दौरान शाम 5:43 से 6:18 बजे के बीच मनोज के व्हाट्सएप पर 65 हजार रुपये खाते में जमा होने जैसा एक फर्जी बैंक मैसेज आया। मैसेज पूरी तरह बैंक अलर्ट जैसा दिख रहा था, जिससे मनोज चतुर्वेदी को विश्वास हो गया कि रकम उनके खाते में आ चुकी है।
इसके बाद उन्होंने बताए गए नंबर पर 65 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपना बैंक बैलेंस चेक किया तो पता चला कि खाते में कोई रकम जमा नहीं हुई थी, बल्कि उनके खाते से ही 65 हजार रुपये कट चुके थे। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगों की तलाश शुरू कर दी है।
