

बंगाली समाज द्वारा 23 मई 2026 को सीएमडी चौक स्थित IMA Hall में “रवीन्द्र-नज़रुल जयंती” का भव्य एवं सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम श्रद्धा, संगीत, नृत्य और साहित्यिक अभिव्यक्तियों से ओतप्रोत रहा।
समारोह का शुभारंभ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर एवं विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम के चित्रों पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर श्री डी. के. बोस, डॉ. हेमंत चटर्जी, श्री सुदीप्त दत्त, श्री देवाशीष नंदी, श्रीमती वंदना राय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत समवेत संगीत से हुई, जिसमें “आकाश भरा सूर्य तारा”, “वैशाखी हे मौनी तपस” तथा “जागो नारी जागो” जैसे गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। इस सामूहिक प्रस्तुति में श्रीमती मौसुमी चक्रवर्ती, श्री सौरभ चक्रवर्ती, श्री शुभांशु शेखर घोष, श्रीमती सीमा सेनगुप्ता, श्रीमती अपर्णा घोष, श्रीमती मोनिका घोष, श्रीमती मीनू दास, श्रीमती अपराजिता चौधुरी, श्रीमती श्रावणी दत्त, श्रीमती स्वस्तिका विश्वास, स्वागता चौधुरी, प्रतिमा पाल, श्री देवाशीष नंदी, डॉ. सुदीप्त दत्त, कैलाश डोडवानी एवं जय डे ने सहभागिता निभाई।

अध्यक्षीय संबोधन में श्री देवाशीष नंदी ने रवीन्द्र एवं नज़रुल साहित्य की मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए। इसके पश्चात डॉ. गोपाल मुखर्जी ने दोनों महान साहित्यकारों के जीवन, दर्शन एवं साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में रवीन्द्र संगीत, नज़रुल गीति, समूह नृत्य तथा नृत्य-नाटिकाओं ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। “हम सबई राजा” समूह नृत्य में आयुषी पालित, आयुष परमानिक, शिवान्या घोष, प्रिशा घोष, आर्मिमा पाल एवं पिहु घोष ने आकर्षक प्रस्तुति दी। इसका निर्देशन गोपा दासगुप्ता ने किया।
“कारार ओई लौह कपाट” समूह नृत्य में श्रीमती पूजा प्रामाणिक, श्रीमती पूजा पालित एवं श्रीमती अदिति चौधुरी की प्रस्तुति ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। वहीं “अभिसार” नृत्याभिनय में श्रीमती मेरिना घोष एवं श्रीमती तनिमा राय ने अपनी अभिव्यक्ति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। “एसो श्यामल सुंदर” पर श्रीमती गोपा दासगुप्ता की नृत्य प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।
संगीत प्रस्तुतियों में डॉ. सुदीप्त दत्ता, श्रीमती मौसुमी चक्रवर्ती, श्रीमती सुक्ति विश्वास, स्वागता चौधुरी, श्री शुभांशु घोष, श्रीमती प्रतिमा पाल, श्रीमती श्रावणी दत्त, श्री सौरभ चक्रवर्ती, सुष्री साहाना दत्त, श्री तुहीन चटर्जी एवं श्रीमती रीता राय ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को सुरमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सौमित्र बसु रचित श्रुति नाटक “नতুন बौठान” का प्रभावशाली मंचन किया गया। इसमें श्रीमती इप्सिता दत्ता एवं श्री राजा दासगुप्ता के अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन भी श्री राजा दासगुप्ता मीनू दास ने किया।
आयोजन में देवाशीष नंदी,जीवन घोष, बिलास दास एवं अशोक बोस का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
अंत में सचिव श्री बिलास दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संपूर्ण आयोजन बंगाली संस्कृति, साहित्य, संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा का जीवंत एवं यादगार उत्सव बन गया।
