डीजल संकट गहराया, हाईवे के कई पंप ड्राई; ड्रम और डिब्बों में बिक्री पर रोक, ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा प्रभावित, लंबी दूरी की बुकिंग लेने में दिक्कत

में पिछले एक सप्ताह से जारी डीजल संकट के बीच जिला प्रशासन ने अब सख्ती बढ़ा दी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने ड्रम, डिब्बों और निजी बोर मशीनों को डीजल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। शिकायतें थीं कि कई पेट्रोल पंप संचालक नियमों की अनदेखी कर खुलेआम ड्रमों और जेरीकेन में डीजल बेच रहे थे, जबकि प्रतिबंधित निजी बोर मशीनों को भी ईंधन की सप्लाई की जा रही थी।

ईरान संकट के चलते राज्य शासन ने प्रदेशभर में केवल वाहनों की टंकी में सीधे पेट्रोल-डीजल भरने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत ड्रम, बोतल और जेरीकेन में खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि किसानों और अति-आवश्यक सेवाओं को एसडीएम की जांच और अनुमति के बाद सुरक्षा मानकों के तहत सीमित छूट दी जा सकेगी।

इधर जिले में पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत नलकूप खनन पर पहले से ही प्रतिबंध लागू है। ऐसे में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने निजी बोर मशीनों को डीजल देने पर भी रोक लगा दी है। पंप संचालकों को चेतावनी दी गई है कि आदेश का उल्लंघन कर किसी निजी बोर मशीन या ड्रम में डीजल दिया गया तो आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

डीजल संकट का सबसे ज्यादा असर हाईवे पर देखने को मिल रहा है। कई पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई हो चुके हैं। जहां डीजल उपलब्ध है, वहां परिचित वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अनजान वाहनों को या तो डीजल नहीं दिया जा रहा या अधिकतम 15 से 20 लीटर तक सीमित किया जा रहा है। पेट्रोल की सप्लाई सामान्य होने से बाइक और कार चालकों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही, लेकिन भारी वाहन और मालवाहक ट्रांसपोर्टर संकट से जूझ रहे हैं।

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अशोक श्रीवास्तव ने कलेक्टर से मुलाकात कर समस्या रखी। कलेक्टर ने डीजल की कमी स्वीकार करते हुए जल्द व्यवस्था सामान्य होने का भरोसा दिया। श्रीवास्तव का कहना है कि ऑयल कंपनियों के अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल की अनिश्चित उपलब्धता के कारण वे लंबी दूरी की बुकिंग लेने से बच रहे हैं।

इधर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद नायक ने किसानों के लिए पर्याप्त डीजल उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारी डीजल संकट से प्रभावित हो रही है। जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में ही डीजल दिया जा रहा है, जिससे ट्रैक्टर और हार्वेस्टर संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में रोजाना पेट्रोल की तुलना में करीब 125 प्रतिशत ज्यादा डीजल की खपत होती है। जहां प्रतिदिन लगभग 24 लाख लीटर पेट्रोल की सप्लाई होती है, वहीं डीजल की मांग करीब 54 लाख लीटर प्रतिदिन है। कोल, स्टील और सीमेंट ट्रांसपोर्ट पर आधारित प्रदेश की माल ढुलाई व्यवस्था डीजल पर अत्यधिक निर्भर है। यही कारण है कि सप्लाई चेन में हल्की रुकावट भी बड़े संकट का रूप ले रही है।

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