
ने दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर अहम फैसला सुनाते हुए 14 से 16 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस की सिंगल बेंच ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि पीड़िता का सुरक्षित गर्भपात विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में तत्काल कराया जाए।
कोर्ट ने आदेश में कहा है कि पीड़िता को अथवा जिला अस्पताल में भर्ती कर मेडिकल प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही, आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने के कारण डॉक्टरों की टीम को भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इसे साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सके।
पीड़िता ने याचिका में बताया था कि आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। मामले में में अपराध दर्ज है। पीड़िता का कहना था कि यह अनचाहा गर्भ उसे मानसिक प्रताड़ना, सामाजिक लोकलाज और असहनीय पीड़ा दे रहा है, इसलिए वह गर्भ जारी नहीं रखना चाहती।
इससे पहले हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें 14 से 16 सप्ताह का गर्भ होना पुष्टि किया गया। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति तत्काल बिलासपुर कलेक्टर, सीएमएचओ और सिम्स के डीन को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
