
बिलासपुर। हाई कोर्ट ने बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि जांच अधिकारी बिना पुख्ता आधार और उचित आकलन के किसी व्यक्ति या कंपनी का बैंक खाता मनमाने ढंग से फ्रीज नहीं कर सकते। कोर्ट ने पुलिस द्वारा एक वित्तीय कंपनी के खाते में होल्ड की गई 43,38,375 रुपए की राशि को अवैध मानते हुए तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस और जस्टिस की डिवीजन बेंच में हुई।
जानकारी के अनुसार श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड ने रायपुर के मंदिर हसौद थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सप्लाई की गई लोहे की छड़ों का वजन कम निकला, जिससे कंपनी को करीब 6.9 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
जांच के दौरान पुलिस ने लोन देने वाली कंपनी ओक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कोटक महिंद्रा बैंक खाते को पूरी तरह फ्रीज कर दिया। बताया गया कि उक्त खाते में प्रतिदिन 12 से 15 करोड़ रुपए तक का लेनदेन होता था।
बाद में पुलिस ने खाता तो अनफ्रीज कर दिया, लेकिन कथित नुकसान का 12.5 प्रतिशत आकलन करते हुए 43,38,375 रुपए की राशि होल्ड पर रख दी। इस कार्रवाई को कंपनी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने माना कि पुलिस की कार्रवाई उचित आधार पर नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां किसी भी खाते को मनमाने तरीके से फ्रीज नहीं कर सकतीं और रकम होल्ड करने के लिए ठोस कारण व कानूनी आधार आवश्यक है। कोर्ट ने होल्ड की गई राशि तत्काल जारी करने के निर्देश दिए हैं।
