अपोलो रोड चौड़ी हुई, लेकिन बीच सड़क छोड़ा गया पुलिया का हिस्सा बना खतरा, चौड़ीकरण और डामरीकरण से लोगों को मिली राहत, मगर अधूरा निर्माण बढ़ा रहा हादसे का डर

शशि मिश्रा

बिलासपुर। लिंगियाडीह चौक से अपोलो अस्पताल जाने वाले बहुप्रतीक्षित सड़क चौड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य लगभग पूरा हो गया है। नई चौड़ी और चमचमाती सड़क बनने से क्षेत्र की तस्वीर बदल गई है और लंबे समय से जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन सड़क के बीचों-बीच छोड़ा गया पुलिया का कलवर्ट अब लोगों के लिए चिंता और दुर्घटना का कारण बनता नजर आ रहा है।

दरअसल अपोलो अस्पताल पहुंच मार्ग पहले बेहद संकरा था। सड़क किनारे अतिक्रमण और कम चौड़ाई के कारण यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती थी। सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस को होती थी, जो कई बार ट्रैफिक में फंस जाती थी। लगातार उठ रही मांग और बढ़ते दबाव के बाद सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू किया गया था। लंबे समय तक निर्माण कार्य चलने के बाद अब यहां डामरीकरण लगभग पूरा कर लिया गया है, जिससे लोगों को काफी राहत मिली है।

हालांकि सड़क निर्माण के बाद एक बड़ी खामी सामने आई है। चौड़ीकरण के दौरान बीच मार्ग में स्थित पुरानी पुलिया के कलवर्ट को पूरी तरह हटाने के बजाय उसका एक हिस्सा सड़क के बीच में ही छोड़ दिया गया है। पुलिया की दीवार अब सीधे सड़क के बीचों-बीच नजर आ रही है, जो तेज रफ्तार वाहनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ी होने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की रफ्तार बढ़ना स्वाभाविक है। रात के समय यदि चालक को सड़क के बीच मौजूद यह अवरोध दिखाई नहीं दिया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल दोनों ओर लगाए गए संकेत चिन्हों में रेडियम लगाए गए थे, लेकिन उन्हें भी किसी ने उखाड़ लिया है। ऐसे में रात के समय यह अवरोध और अधिक खतरनाक हो जाता है।

लोगों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के दौर में सड़क के बीच इस तरह पुलिया का हिस्सा छोड़ देना इंजीनियरिंग की गंभीर चूक को दर्शाता है। क्षेत्रवासियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किस तकनीकी सोच के तहत सड़क के बीच इस तरह का ढांचा छोड़ा गया।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। जब तक पुलिया के हिस्से को हटाया नहीं जाता, तब तक यहां मजबूत संकेतक, रिफ्लेक्टर और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था लगाई जाए ताकि रात में वाहन चालकों को यह स्पष्ट दिखाई दे सके और किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

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