

बिलासपुर। तारबाहर वार्ड क्रमांक 29 का उप चुनाव अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक दी है। वार्ड में डोर-टू-डोर जनसंपर्क, मोहल्ला बैठकें और कार्यकर्ताओं की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
भाजपा इस चुनाव को विकास, मूलभूत सुविधाओं और संगठन की ताकत के आधार पर लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस पूर्व पार्षद स्वर्गीय शेख गफ्फार की छवि, जनसंपर्क और सहानुभूति लहर के सहारे चुनावी माहौल बनाने में जुटी है।

भाजपा का फोकस विकास और योजनाओं पर
भाजपा ने वार्ड में पानी, सड़क, सफाई और अधूरे विकास कार्यों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी नेता घर-घर पहुंचकर सरकार की योजनाओं और निगम के साथ बेहतर समन्वय से विकास कार्य तेज होने का संदेश दे रहे हैं। महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और पार्षदों की अलग-अलग टीमों को भी प्रचार में सक्रिय किया गया है।
भाजपा की रणनीति महतारी वंदन योजना के जरिए महिला मतदाताओं को साधने की भी है। साथ ही बूथ स्तर पर बैठकें कर संगठन को मजबूत किया जा रहा है। पार्टी सामाजिक और जातीय समीकरणों पर भी नजर बनाए हुए है, ताकि हर वर्ग तक पहुंच बनाई जा सके।
कांग्रेस को पुराने नेटवर्क और सहानुभूति पर भरोसा
कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में पूर्व पार्षद स्व. शेख गफ्फार के कार्यकाल और जनता से उनके व्यक्तिगत रिश्तों को प्रमुखता से सामने रखा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि गफ्फार परिवार का वार्ड में मजबूत जनाधार और भावनात्मक जुड़ाव अब भी कायम है।
कांग्रेस मोहल्ला बैठकों और जनसंपर्क अभियान के जरिए पुराने समर्थकों को सक्रिय करने में जुटी है। पार्टी की रणनीति पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने और सहानुभूति लहर को मजबूत करने की है।
इसके साथ ही कांग्रेस बिजली कटौती, भारी बिजली बिल और पानी की समस्या को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वार्ड की जनता लंबे समय से गफ्फार परिवार पर भरोसा जताती आई है और इस चुनाव में भी वही समर्थन मिलेगा।
तारबाहर उप चुनाव अब केवल वार्ड की सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे दोनों दल संगठन और जनाधार की ताकत दिखाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
