

बिलासपुर। साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस द्वारा “साइबर पर संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशेष अंतर-विभागीय साइबर जागरूकता एवं समन्वय कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आयकर विभाग, विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल तथा साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के नोडल अधिकारी श्री गगन कुमार (भा.पु.से.) ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से साइबर अपराध की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देशभर में अब तक लगभग 28 लाख लोग साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं और 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवा चुके हैं। उन्होंने कई वास्तविक मामलों का उल्लेख करते हुए बताया कि अपराधी बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर फर्जी एवं म्यूल अकाउंट खोलते हैं तथा कई मामलों में अंदरूनी सहयोग भी सामने आता है।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठित आर्थिक अपराध का स्वरूप ले चुका है, जिसमें फर्जी दस्तावेज, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बैंकिंग तंत्र का बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) ने बैंक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक वर्तमान समय में साइबर अपराधियों के सबसे आसान लक्ष्य बनते जा रहे हैं। उन्होंने बैंक कर्मचारियों से अपील की कि बड़ी राशि निकालने आने वाले वरिष्ठ नागरिकों से संवेदनशीलता के साथ पूछताछ कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे किसी डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी या अन्य साइबर ठगी का शिकार तो नहीं हो रहे हैं।
एसएसपी श्री सिंह ने यह गंभीर विषय भी उठाया कि कई बार साइबर पोर्टल द्वारा खातों पर lien अथवा hold लगाए जाने के बावजूद खातों से राशि डेबिट होती रहती है, जिससे पीड़ितों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध ट्रांजेक्शन की सूचना समय पर पुलिस को देकर बैंक अपराध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री राम गोपाल गर्ग (भा.पु.से.) ने कार्यक्रम में बैंकों से “Enhanced Due Diligence” अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि करंट अकाउंट खोलते समय केवल दस्तावेजों तक सीमित न रहकर फर्म का भौतिक सत्यापन, व्यवसायिक गतिविधियों की फोटोग्राफी तथा शुरुआती दिनों में ट्रांजेक्शन लिमिट जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग ठगी की राशि प्राप्त कर तुरंत ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
आईजी श्री गर्ग ने genuine खाताधारकों के खातों को शीघ्र डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया को भी सरल और व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने हरियाणा पुलिस एवं HDFC बैंक द्वारा लागू Dual OTP Authentication System को वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा की दिशा में प्रभावी पहल बताया।
कार्यक्रम में RBI के महाप्रबंधक श्री मनीष पराशर ने साइबर अपराध और बैंकिंग दायित्वों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने Risk Categorisation, Suspicious Transaction Report (STR) प्रणाली तथा बैंकों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने RBI की “Mule Hunter.AI” पहल का भी उल्लेख किया, जो Artificial Intelligence और Machine Learning आधारित प्रणाली के जरिए संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान करने में मदद करती है।
आयकर विभाग से उपस्थित श्री चंद्रशेखर मेहरा, IRS (2020 बैच) ने शेल कंपनियों की कार्यप्रणाली, टैक्स अधिकारियों के नाम पर होने वाली साइबर ठगी तथा संदिग्ध कंपनियों की पहचान की प्रक्रिया पर जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में सुश्री अंशिका जैन (आईपीएस), RBI से डीजीएम श्री प्रदीप गोंधुले, आयकर विभाग से एडीआईटी श्री रंजन, विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल एवं साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन साइबर अपराध के विरुद्ध संयुक्त रूप से प्रभावी लड़ाई लड़ने और नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
