“डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर 82 वर्षीय महिला से 1.04 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए बनाया शिकार, बिलासपुर में मामला दर्ज


बिलासपुर, 30 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर ठगों ने एक 82 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक महिला को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये की ठगी को अंजाम दिया। यह घटना साइबर अपराध के नए और खतरनाक तरीके को उजागर करती है, जिसमें अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण कर लोगों को मानसिक रूप से दबाव में लेते हैं।
कैसे हुई ठगी
पुलिस के अनुसार, 20 अप्रैल 2026 को महिला के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से WhatsApp कॉल और संदेश आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी “संजय, PSI” बताया और महिला पर “टेरर फंडिंग केस” में शामिल होने का आरोप लगाया।
इसके बाद वीडियो कॉल के माध्यम से एक नकली “क्राइम ब्रांच” जैसा माहौल तैयार किया गया, जिससे महिला को विश्वास दिलाया गया कि वह पुलिस निगरानी में हैं और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जा चुका है। ठगों ने महिला को धमकाया कि यदि उन्होंने किसी को जानकारी दी या घर से बाहर निकलीं तो तत्काल गिरफ्तारी होगी।
बैंक जानकारी लेकर चरणबद्ध तरीके से रकम निकाली
आरोपियों ने महिला से उनके बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, डेबिट कार्ड और अन्य बचत की पूरी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद “जांच प्रक्रिया” के नाम पर रकम को कथित सरकारी अथवा रिजर्व बैंक के खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया।
डर और भ्रम की स्थिति में महिला ने अलग-अलग चरणों में कुल 1.04 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठग लगातार संपर्क में रहे और WhatsApp के जरिए फर्जी नोटिस व दस्तावेज भेजते रहे। जब आरोपियों ने अतिरिक्त 50 लाख रुपये की मांग की, तब परिवार को संदेह हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार “डिजिटल अरेस्ट” पूरी तरह फर्जी अवधारणा है। अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे धन उगाही करते हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध एजेंसी:
फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती
WhatsApp पर नोटिस या वारंट जारी नहीं करती
बैंक डिटेल्स या OTP की मांग नहीं करती
सतर्कता ही बचाव
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे कॉल या संदेश मिलने पर घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काट दें और किसी भी स्थिति में पैसे ट्रांसफर न करें। संदिग्ध मामलों की जानकारी तुरंत परिवार या पुलिस को दें।
साइबर अपराध से संबंधित शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा राष्ट्रीय पोर्टल www.cybercrime.gov.in⁠� पर संपर्क किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण संकेत
यह मामला दर्शाता है कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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