
बिलासपुर। शहर के एक जूता कारोबारी पर राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर 3 डिसमिल जमीन को 6 डिसमिल दर्शाने और बाद में उसी जमीन को दो अलग-अलग लोगों को बेचने का मामला सामने आया है। जांच के बाद पुलिस ने कारोबारी किशोर दयालानी और तत्कालीन हल्का पटवारी धीरेंद्र सिंह समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में अपराध दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, सिंधी कॉलोनी स्मार्ट रोड निवासी किशोर दयालानी ने 16 जनवरी 2009 को कहरवा नगर, जरहाभाठा स्थित खसरा नंबर 54/25 की भूमि लोईस हीराधर और श्वेता हीराधर से खरीदी थी। रजिस्ट्री तथा वर्ष 2002 से 2006 तक के बी-1 रिकॉर्ड के अनुसार उक्त भूमि का रकबा 0.012 हेक्टेयर, यानी लगभग 3 डिसमिल (1295 वर्गफुट) था।
आरोप है कि वर्ष 2006-07 से 2010-11 के बीच राजस्व अभिलेखों में ओवरराइटिंग कर भूमि का रकबा 0.012 हेक्टेयर से बढ़ाकर 0.024 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया। जांच में सामने आया कि मूल खसरा फॉर्म पी-2 में पेन से काट-छांट कर यह बदलाव किया गया। इसके बाद कागजों में भूमि का रकबा दोगुना दिखाते हुए किशोर दयालानी ने 3-3 डिसमिल के दो हिस्से बनाकर 14 मार्च 2011 को एक हिस्सा अनिल मोटवानी और दूसरा हिस्सा रेशमा मोटवानी के नाम विक्रय कर दिया।
प्रॉपर्टी निवेशक की जांच में खुला मामला
मामले का खुलासा सिंधी कॉलोनी निवासी प्रॉपर्टी निवेशक शंकर लाल दयालानी की पड़ताल के दौरान हुआ। बताया गया कि विवादित भूमि पर बने मकान की बिक्री की तैयारी चल रही थी। शंकर लाल दयालानी मकान खरीदने के इच्छुक थे, इसलिए उन्होंने वर्ष 2002 से 2011 तक के राजस्व रिकॉर्ड, बी-1 और खसरा पी-2 की जांच कराई। दस्तावेजों के परीक्षण में रिकॉर्ड में की गई कथित काट-छांट और हेरफेर सामने आ गई।
शिकायत और दस्तावेजी जांच के आधार पर पुलिस ने जूता कारोबारी किशोर दयालानी तथा तत्कालीन हल्का पटवारी धीरेंद्र सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका रही या नहीं।
