अहमदाबाद में ‘भूतिया मकान’ का रहस्य उजागर: 35 वर्ष पुराना हत्या का मामला हुआ उजागर


अहमदाबाद, गुजरात। शहर के वटवा क्षेत्र स्थित कुतुब नगर इलाके में एक कथित ‘भूतिया मकान’ को लेकर वर्षों से फैल रही अफवाहों का अंत अंततः एक सनसनीखेज खुलासे के साथ हुआ। पुलिस जांच में यह मामला अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक पुरानी हत्या से जुड़ा पाया गया है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उक्त मकान में जो भी परिवार रहने आता था, वह कुछ ही दिनों के भीतर अजीब घटनाओं और कथित रूप से ‘भूत-प्रेत’ के अनुभवों की शिकायत करते हुए मकान खाली कर देता था। इसी कारण यह मकान बीते वर्षों में चार से पांच बार खरीदा और बेचा गया। मकान में रहने वाले कई लोगों ने तांत्रिक विधियों का भी सहारा लिया, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
जब इस ‘भूतिया मकान’ की चर्चा व्यापक रूप से फैलने लगी, तब मामले ने पुलिस का ध्यान आकर्षित किया। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इसे अंधविश्वास या शरारत मानते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक पड़ताल के दौरान अधिकारियों को जानकारी मिली कि इस क्षेत्र की एक महिला, शबनम उर्फ फरजाना, पिछले लगभग 35 वर्षों से लापता है।
जांच को आगे बढ़ाते हुए क्राइम ब्रांच ने स्थानीय निवासियों से पूछताछ की। कई लोगों ने मकान में असामान्य गतिविधियों और ‘भूत’ के देखे जाने की पुष्टि की। इसके बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर मकान की खुदाई कराने का निर्णय लिया।
दो जेसीबी मशीनों की मदद से मकान को तोड़कर जब जमीन की खुदाई की गई, तो अंदर से एक महिला का कंकाल बरामद हुआ। जांच में पुष्टि हुई कि यह वही महिला है, जो 35 वर्ष पूर्व लापता हुई थी।
पुलिस के अनुसार, लगभग तीन दशक पहले शमसुद्दीन नामक व्यक्ति का पड़ोस में रहने वाली विवाहित महिला फरजाना उर्फ शबनम के साथ प्रेम संबंध था। किसी विवाद के चलते शमसुद्दीन ने उसकी हत्या कर दी और शव को मकान के भीतर स्थित एक कुएं में दफना दिया। इसके बाद वह मकान बेचकर फरार हो गया।
इस घटना के बाद से मकान में रहने वाले प्रत्येक नए मालिक ने अजीब अनुभवों की शिकायत की और अंततः मकान बेच दिया। अब इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ‘भूतिया घटनाओं’ के पीछे एक गंभीर आपराधिक सच्चाई छिपी हुई थी।
पुलिस ने मामले को पुनः दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि कई बार अंधविश्वास के पीछे छिपे तथ्यों को समझना कितना आवश्यक होता है।

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