

बिलासपुर | हत्या जैसे संगीन मामलों में अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसने और अदालतों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि (कन्विक्शन) सुनिश्चित करने के लिए बिलासपुर रेंज पुलिस ने कमर कस ली है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री रामगोपाल गर्ग ने मंगलवार को रेंज के पुलिस अधिकारियों के लिए एक विशेष ‘प्रशिक्षण सत्र’ आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने ‘स्मार्ट विवेचना’ के लिए नई कार्ययोजना और 124 बिंदुओं का एक विस्तृत प्रोटोकॉल (चेकलिस्ट) जारी किया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर, केवल गिरफ्तारी मकसद नहीं
वर्चुअल मोड पर आयोजित इस सत्र में आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट किया कि पुलिस का लक्ष्य केवल आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि उसे सजा दिलाना है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2026 के बाद होने वाली हत्या की सभी जांचें नए वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप होंगी। अब हर चार्जशीट के साथ एक अनिवार्य चेकलिस्ट लगानी होगी, जिससे मानवीय त्रुटि की गुंजाइश खत्म हो सके।
नए कानूनों का पालन और ‘ई-साक्ष्य’ का उपयोग
प्रशिक्षण में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की बारीकियों को समझाया गया। अब धारा 105 के तहत सभी जप्तियां ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से वीडियोग्राफी करते हुए की जाएंगी। इससे गवाहों के मुकर जाने पर भी तकनीकी साक्ष्य अदालत में प्रभावी रहेंगे।
केस डायरी का हिस्सा बनेंगे डिजिटल फुटप्रिंट्स
नई रणनीति के तहत अब विवेचक (IO) आरोपियों के गूगल टेकआउट, इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स जैसे डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच करेंगे। घटनास्थल के 100 किमी के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग ‘त्रिनयन ऐप’ से होगी। सीसीटीवी फुटेज को सीधे डीवीआर से जप्त कर धारा 63(4)(c) के तहत प्रमाणित कर केस डायरी में शामिल किया जाएगा।
जांच में इन कड़े नियमों का होगा पालन:
लगोल्डन ऑवर का महत्व:घटनास्थल को तत्काल सील किया जाएगा; बिना दस्ताने साक्ष्यों को छूना प्रतिबंधित रहेगा।
DNA साक्ष्य: मृतक के नाखूनों में फंसी स्किन या बाल जैसे सूक्ष्म साक्ष्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
रात्रिकालीन पोस्टमार्टम: संवेदनशील मामलों में पर्याप्त रोशनी में रात में भी पीएम कराया जा सकेगा, जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।
चेन ऑफ कस्टडी: मालखाने से लेकर एफएसएल (FSL) तक साक्ष्यों के पहुंचने का पल-पल का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
हर सप्ताह होगा प्रशिक्षण
इस सत्र में मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के एएसपी, डीएसपी और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हुए। आईजीपी श्री गर्ग ने स्वयं पीपीटी के माध्यम से ‘की-पॉइंट्स’ साझा किए। उन्होंने घोषणा की कि पुलिस अधिकारियों को आधुनिक अनुसंधान तकनीकों से अपडेट रखने के लिए हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर ऐसे प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
