

रायपुर, 27 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के डीडी नगर क्षेत्र में एक चौंकाने वाला पारिवारिक हत्याकांड सामने आया है, जहां पत्नी और दो बेटियों ने मिलकर घर के मुखिया की हत्या कर दी। प्रारंभिक तौर पर इसे बाथरूम में गिरने से हुई मौत बताया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मामला हत्या में तब्दील हो गया।
पुलिस के अनुसार, मृतक वीरेंद्र भारती गोस्वामी, जो विपणन संघ में चपरासी के पद पर कार्यरत थे, अपने परिवार के साथ डीडी नगर में रहते थे। परिवार में उनकी पत्नी दीपा भारती गोस्वामी (44 वर्ष), बड़ी बेटी तनिया (19 वर्ष) और एक नाबालिग बेटी शामिल हैं।
बताया गया कि दिसंबर 2025 में देर रात पिता ने अपनी बड़ी बेटी को मोबाइल पर रील्स देखते हुए टोका और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे उग्र झगड़े में बदल गया। विवाद के दौरान बेटी ने पिता के साथ अभद्र टिप्पणी की, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
जांच में सामने आया कि बहस के दौरान बड़ी बेटी ने लकड़ी के बैट से पिता पर हमला कर दिया। इसके बाद पत्नी और नाबालिग बेटी भी हमले में शामिल हो गईं। तीनों ने मिलकर वीरेंद्र भारती पर बैट और ईंट से कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़े। लगातार हमले के कारण उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। खून के निशान साफ किए गए, हमले में प्रयुक्त बैट और ईंट को नाले में फेंक दिया गया। इसके बाद शरीर पर हल्दी लगाकर पट्टी बांधी गई और घटना को बाथरूम में गिरने से हुई दुर्घटना का रूप दिया गया।
अगले दिन पुलिस को भी यही जानकारी दी गई, जिसके आधार पर प्रारंभिक कार्रवाई दुर्घटना मानकर की गई। अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इतना ही नहीं पत्नी अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर सरकारी नौकरी भी करने लगी।
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 17 गहरे घाव पाए गए और सिर पर किसी भारी वस्तु से हमले की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, जिसमें पत्नी और बड़ी बेटी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी पत्नी दीपा भारती गोस्वामी और बड़ी बेटी तनिया को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि नाबालिग बेटी को बाल सुधार गृह भेजा गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
यह घटना पारिवारिक विवाद के हिंसक रूप लेने का गंभीर उदाहरण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और पारिवारिक संवाद की कमी के चलते ऐसे विवाद तेजी से उग्र हो सकते हैं, जिनके दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं।
