
बिलासपुर। शहर में अपराध नियंत्रण को लेकर शुरू किए गए ‘त्रिनेत्र प्रोजेक्ट’ को व्यापारियों और आम नागरिकों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। महज 15 दिनों के भीतर इस पहल के लिए करीब एक करोड़ रुपये की राशि जुटा ली गई है। परियोजना के तहत शहर में लगभग 1000 सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है।
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईटीएमएस) में आयोजित त्रिनेत्र सेवा समिति की बैठक में अध्यक्ष रामावतार अग्रवाल ने बताया कि जिस गति से लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि शहरवासी सुरक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के प्रति गंभीर हैं। प्रोजेक्ट के लिए कुल 10 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक एक करोड़ रुपये एकत्रित किए जा चुके हैं।
परियोजना को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए अडानी गैस और विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों को भी जोड़ा जाएगा। इस संबंध में 20 अप्रैल को तकनीकी समिति की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संबंधित कंपनियों के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में अंडरग्राउंड केबलिंग और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा, ताकि कैमरों की स्थापना में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए।
स्मार्ट सिटी क्षेत्र को प्राथमिकता
योजना के तहत सबसे पहले स्मार्ट सिटी क्षेत्र में कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों के इंस्टॉलेशन और रखरखाव की जिम्मेदारी त्रिनेत्र सेवा समिति के पास होगी। 20 अप्रैल की बैठक में इस कार्य की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
प्रचार के लिए अलग समिति गठित
परियोजना से अधिकाधिक लोगों को जोड़ने के लिए एक प्रचार समिति का गठन किया गया है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाएगी। इस समिति की जिम्मेदारी मनीष अग्रवाल को सौंपी गई है।
विभिन्न समितियों का गठन
कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह की उपस्थिति में प्रोजेक्ट के विस्तार हेतु अलग-अलग समितियों का गठन किया गया। व्यावसायिक समन्वय समिति के अध्यक्ष सुनील सोंथालिया बनाए गए हैं, जो व्यापारिक संगठनों के समन्वय का कार्य करेंगे। वहीं सहयोग संवर्धन समिति की जिम्मेदारी प्रवीण झा को दी गई है, जो नागरिकों से सहयोग जुटाने का कार्य संभालेंगे।
स्मार्ट कैमरों से अपराध नियंत्रण की उम्मीद
प्रोजेक्ट के तहत क्लाउड बेस्ड मॉनिटरिंग एंड इंटीग्रेशन (सीबीएमआई) तकनीक वाले स्मार्ट कैमरे लगाने का प्रस्ताव है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन कैमरों के माध्यम से सड़क पर होने वाले अपराधों में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। वर्तमान में शहर के करीब 70 प्रतिशत अपराध सड़कों पर होते हैं। एआई तकनीक से लैस ये कैमरे चेहरे की पहचान और वाहन नंबर प्लेट पढ़ने में सक्षम होंगे, जिससे कंट्रोल रूम को त्वरित अलर्ट मिलेगा और पुलिस की जांच क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
