
बिलासपुर। शहर के सरकंडा क्षेत्र में इन दिनों पेयजल व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है। वार्ड-60 कपिल नगर और वार्ड-62 शास्त्री नगर सहित करीब दर्जन भर वार्डों में गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, वहीं नगर निगम के अधिकारी शिकायत मिलने से ही इनकार कर रहे हैं।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार शास्त्री नगर के नेपाली मोहल्ला, बंगाली पारा गली नंबर-2, बरछापारा और संजय बदेरा गली में नलों से मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है। पानी की स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को उसे उबालकर पीना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है। इससे पहले मगरपारा और तालापारा क्षेत्र के वार्ड 23 से 26 में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
नगर निगम में उप नेता प्रतिपक्ष संतोषी रमाशंकर बघेल ने बताया कि उन्होंने निगम कमिश्नर को लिखित में शिकायत दी है, लेकिन अब तक जांच तक नहीं कराई गई। उनका कहना है कि कई वार्डों में स्थिति गंभीर है—कहीं पानी साफ आ रहा है तो कहीं बेहद गंदा, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक दूषित पानी का उपयोग करने से पेट और संक्रमण संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है।
वहीं, जल शाखा प्रभारी अनुपम तिवारी का कहना है कि फिलहाल किसी भी वार्ड से गंदा पानी आने की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर सुधार किया जाएगा।
अवैध कनेक्शन बने बड़ी समस्या, 20 हजार से ज्यादा अब भी सक्रिय
शहर में गंदे पानी और पेयजल संकट की एक बड़ी वजह अवैध नल कनेक्शन भी माने जा रहे हैं। निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर के 70 वार्डों में 44,281 सामान्य और 5,502 भागीरथी योजना के वैध कनेक्शन हैं, जबकि करीब 20 हजार अवैध कनेक्शन अब भी सक्रिय हैं।
इन अवैध कनेक्शनों के कारण पाइपलाइन में लीकेज की समस्या बढ़ रही है, जिससे दूषित पानी सप्लाई हो रहा है। निगम ने अवैध कनेक्शनों को वैध करने के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की थी, लेकिन एक साल में एक भी कनेक्शन वैध नहीं हो सका।
तीन साल पहले अवैध कनेक्शनों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया था, लेकिन विवाद और राजनीतिक दबाव के चलते यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया। अब तक केवल 5 कनेक्शन ही काटे जा सके हैं।
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2019 से अब तक अवैध कनेक्शनों के कारण निगम को करीब 3 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा, निर्माण कार्यों के दौरान ठेकेदारों द्वारा पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी आम हैं। निगम द्वारा जुर्माना तो लगाया जाता है, लेकिन यह राशि मरम्मत लागत से भी कम होती है।
स्थिति गंभीर, समाधान का इंतजार
शहर में लगातार बढ़ती गंदे पानी की समस्या और निगम की उदासीनता से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाता है, या फिर लोगों को यूं ही दूषित पानी पीने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा।
