बजट से पहले भाजपा में घमासान, मेयर और पार्षद के बीच तीखी नोकझोंक


बिलासपुर। नगर निगम की 13 अप्रैल को प्रस्तावित सामान्य सभा और बजट पेश होने से ठीक पहले भाजपा में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। शनिवार को भाजपा कार्यालय में हुई पार्षद दल की बैठक में सफाई व्यवस्था को लेकर मेयर और एक पार्षद के बीच तीखी बहस हो गई, जिससे पार्टी के भीतर सियासी दरार उजागर हो गई।
बैठक की शुरुआत तो सामान्य रूप से हुई, लेकिन कुछ ही देर में माहौल गरमा गया। बैठक में शहर विधायक स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित रहे, जबकि तखतपुर, बेलतरा और बिल्हा के विधायक भी शामिल नहीं हुए। जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर और मोहित जायसवाल की मौजूदगी में चर्चा शुरू हुई थी।


सफाई मुद्दे पर भड़का विवाद


बैठक के दौरान पार्षद रंगा नादम ने शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दिल्ली लायंस कंपनी के कामकाज को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। डिवाइडर और फुटपाथ की नियमित धुलाई नहीं हो रही है, कचरा और गोबर तक नहीं उठाया जा रहा, इसके बावजूद कंपनी को ठेके में एक्सटेंशन देने के साथ 5 प्रतिशत की दर वृद्धि कर दी गई।


उन्होंने यह भी कहा कि खराब प्रदर्शन के बावजूद कंपनी को हर महीने करीब 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।


‘कांग्रेस से संबंध’ को लेकर तीखी नोंकझोंक


सफाई मुद्दे पर शुरू हुई बहस जल्द ही व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई। मेयर पूजा विधानी ने पार्षद रंगा नादमवपर कांग्रेसियों से सांठगांठ का आरोप लगाया और कहा कि वे कांग्रेस से आए हैं और उसी मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं।
इस पर पलटवार करते हुए पार्षद ने मेयर पर ही निशाना साधते हुए कहा कि उनका खुद का भी कांग्रेस से पुराना संबंध रहा है और वे भी कांग्रेस से भाजपा में आई हैं। इसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।


मेयर ने विवाद से किया इनकार
हालांकि, मेयर पूजा विधानी ने बैठक में किसी बड़े विवाद से इनकार करते हुए कहा कि पार्षद ने केवल सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और इसे विवाद का रूप देना गलत है।
पुराने राजनीतिक संदर्भ भी आए सामने
बैठक के दौरान पुराने राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा में आए। बताया गया कि जोगी शासनकाल में, जब उमाशंकर जायसवाल मेयर थे, उस दौरान सरगांव में एक सभा में कई पार्षद और एमआईसी सदस्य कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय पूजा विधानी का नाम भी इसमें शामिल रहा था। बाद में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर सभी नेता फिर से भाजपा में लौट आए।
बजट से पहले बढ़ी सियासी हलचल
निगम के बजट से ठीक पहले इस तरह की अंदरूनी खींचतान ने भाजपा की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सफाई जैसे बुनियादी मुद्दे पर पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आना आने वाले समय में निगम की कार्यप्रणाली और राजनीति दोनों पर असर डाल सकता है।
अब नजर 13 अप्रैल को होने वाली सामान्य सभा और बजट पेशी पर है, जहां इन मुद्दों की गूंज सुनाई देने की पूरी संभावना है।

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