
यूनुस मेमन

बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन के दौरान एक नाबालिग की मौत के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। यह घटना अवैध खनन गतिविधियों की गंभीरता और उससे जुड़े जोखिमों को उजागर करती है।
9 अप्रैल 2026 की रात लगभग 3 बजे रतनपुर पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम गढ़वट के पास खारंग नदी किनारे रेत परिवहन के दौरान एक नाबालिग युवक की मौत हो गई है। मृतक की पहचान 17 वर्षीय अमित कश्यप के रूप में हुई, जो ट्रैक्टर में सवार था।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी (प्रशिक्षु आईपीएस) अंशिका जैन ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया।
जांच में सामने आई सच्चाई
प्रारंभिक जानकारी में इसे ट्रैक्टर दुर्घटना बताया गया था, लेकिन मर्ग जांच के दौरान मामला संदिग्ध पाया गया। विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी तोषण कश्यप द्वारा खारंग नदी से अवैध रूप से रेत खनन किया जा रहा था।
जांच में यह सामने आया कि अधिक रेत निकालने के लालच में नदी के भीतर 6-7 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। आरोपी को इस बात की जानकारी थी कि गड्ढा कभी भी धंस सकता है, इसके बावजूद उसने नाबालिग अमित कश्यप और एक अन्य युवक अमित यादव को उसमें उतारकर काम कराया।
इसी दौरान अचानक रेत और मिट्टी धंसने से अमित कश्यप दब गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अमित यादव गंभीर रूप से घायल हो गया।
साक्ष्य छुपाने की कोशिश
घटना के बाद आरोपी ने सच्चाई छुपाने के लिए ट्रैक्टर को मौके से हटाकर ट्रॉली पलट दी और इसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। हालांकि पुलिस जांच में यह प्रयास विफल हो गया और पूरा मामला उजागर हो गया।
पुलिस ने आरोपी तोषण कश्यप (34 वर्ष), निवासी ग्राम गढ़वट, थाना रतनपुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 और 238(बी) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस टीम की भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी अंशिका जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक विष्णु यादव, सहायक उपनिरीक्षक नरेश गर्ग और आरक्षक गोविंदा यादव का विशेष योगदान रहा।
यह घटना अवैध रेत खनन के खतरनाक स्वरूप और उसमें लगे लोगों की लापरवाही को उजागर करती है। प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई के बावजूद इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त निगरानी और कठोर दंड के साथ-साथ जनजागरूकता भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
