

बिलासपुर जिले के तखतपुर थाना क्षेत्र में टोनही प्रताड़ना जैसे सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
प्रार्थिया ने दिनांक 5 अप्रैल 2026 को थाना तखतपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके घर के पास रहने वाला देवेन्द्र बघेल गिर गया था। आवाज सुनकर जब वह बाहर निकली, तभी देवेन्द्र की मां सुमित्रा बाई वहां पहुंची और उसे गाली-गलौज करते हुए मारपीट की।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
जांच के दौरान प्रार्थिया और गवाहों के बयान के आधार पर यह सामने आया कि आरोपियों द्वारा महिला को “टोनही” (डायन) कहकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 की धारा 4 और 5 भी जोड़ी गई।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई
मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई, जिस पर पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए गए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) और एसडीओपी कोटा श्रीमती नुपूर उपाध्याय के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी देवेन्द्र बघेल (28 वर्ष) और सुमित्रा बाई बघेल (49 वर्ष), निवासी ढनढन, थाना तखतपुर को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
टीम का सराहनीय योगदान
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार पाण्डेय, उपनिरीक्षक रमेश ओरके, आरक्षक आशीष वस्त्रकार, हरीश यादव और महिला आरक्षक सुनीता मार्को का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सामाजिक कुरीति का दंश
टोनही प्रथा आज भी ग्रामीण इलाकों में एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। अशिक्षा और अंधविश्वास के चलते कई बार महिलाओं—खासकर गरीब, विधवा, अकेली या कमजोर वर्ग की महिलाओं—को निशाना बनाया जाता है।
अक्सर ऐसे मामलों के पीछे संपत्ति हड़पने की मंशा, व्यक्तिगत दुश्मनी या महिलाओं का शोषण करने की कोशिश जैसे कारण सामने आते हैं। कई बार पारिवारिक रंजिश निकालने के लिए भी इस तरह के आरोप लगाए जाते हैं।
तखतपुर पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ कानून का सख्त संदेश देती है, बल्कि समाज में व्याप्त इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत को उजागर करती है। जब तक शिक्षा और जागरूकता का स्तर नहीं बढ़ेगा, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना रहेगा।
