

इंदौर। महज एक मामूली सड़क हादसा, गाड़ी पर आई एक खरोंच और उसके बाद बढ़ते दबाव ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। इंदौर में टैक्सी चालक अभिषेक पाटिल की आत्महत्या ने कानून-व्यवस्था और आम आदमी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि 6 अप्रैल की रात अभिषेक की गाड़ी की एक कार से हल्की टक्कर हो गई थी। हादसे में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, सिर्फ गाड़ी पर एक खरोंच आई थी। लेकिन इसके बाद विवाद बढ़ गया। कार मालिक ने अभिषेक से 25 हजार रुपये की मांग की। अभिषेक ने गाड़ी ठीक करवाने की बात कही, लेकिन इतनी बड़ी रकम देने से इनकार कर दिया।
मामला थाने पहुंचा, जहां न्याय मिलने की उम्मीद थी। आरोप है कि वहां स्थिति और बिगड़ गई। संबंधित सब-इंस्पेक्टर मनोहर पाल ने अभिषेक से 50 हजार रुपये की मांग की। रकम न देने पर उसे मारपीट और जेल भेजने की धमकी दी गई।
इस दबाव और अपमान से आहत अभिषेक पूरी तरह टूट गया। घर लौटकर उसने एक वीडियो बनाया, जिसमें उसने अपनी बेबसी जाहिर की। वीडियो में उसने कहा कि गलती उसकी नहीं थी, फिर भी उस पर 25 हजार और 50 हजार रुपये का दबाव बनाया जा रहा है। उसने मारपीट और किसी से मदद न मिलने की बात भी कही।
इसके बाद अभिषेक ने आत्महत्या कर ली। सुबह जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली, तो घर में मातम छा गया।
घटना के बाद संबंधित एसआई को निलंबित कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या एक आम आदमी सिस्टम के सामने इतना बेबस हो चुका है कि उसे न्याय की उम्मीद भी नहीं रह गई?
अभिषेक की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि उस दर्द की कहानी है, जहां एक आम नागरिक दबाव, भय और अन्याय के बीच पिसता चला जाता है।
