

बिलासपुर। 14 अप्रैल को खरमास की समाप्ति के साथ ही शहर सहित पूरे प्रदेश में एक बार फिर मांगलिक कार्यों की रौनक लौटने जा रही है। 16 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे, जो जुलाई मध्य तक जारी रहेंगे। इस अवधि में 12 से अधिक प्रमुख विवाह मुहूर्त बन रहे हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 16 अप्रैल को स्वाति नक्षत्र और आनंद योग के संयोग के कारण इस सीजन का पहला श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त भी विशेष रहेगा, जिसमें बिना पंचांग देखे विवाह संपन्न किए जा सकेंगे।
अधिकमास में रहेगा विराम
इस बार 17 मई से 15 जून तक अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा, जिसके दौरान सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कार नहीं किए जाएंगे। यह समय पूजा-पाठ, जप-तप और दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

पंडितों के अनुसार, अधिकमास के कारण इस बार दो ज्येष्ठ मास पड़ेंगे। पहला ज्येष्ठ मास अशुभ माना जाएगा, जबकि दूसरे ज्येष्ठ मास में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
जुलाई तक मिलेंगे कई शुभ मुहूर्त
इस विवाह सीजन में अप्रैल से लेकर देवशयनी एकादशी तक कुल 12 प्रमुख मुहूर्त बन रहे हैं। इनमें अप्रैल में 20-21, मई में 5, 7, 8, जून में 21, 27, 28, 29 और जुलाई में 1, 7, 8 तारीख शामिल हैं। हालांकि 23 जुलाई को भड़ली नवमी पर विवाह का मुहूर्त नहीं रहेगा।
43 दिन का होगा ज्येष्ठ मास
इस वर्ष ज्येष्ठ मास सामान्य 30 दिनों की बजाय 43 दिनों का होगा। अधिकमास लगभग हर 32 माह में आता है, जिसका उद्देश्य सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करना होता है।
25 जुलाई से फिर थमेंगे मांगलिक कार्य
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे और चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इस दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य पुनः बंद हो जाएंगे। इसके बाद नवंबर में देवउठनी एकादशी से फिर शादियों का सीजन शुरू होगा।
