अनुदान की होड़ में खुली पोल: अधूरे दस्तावेजों के चलते 39 में 34 गौधाम प्रस्ताव खारिज


बिलासपुर। जिले में गौ संरक्षण के नाम पर अनुदान पाने की होड़ के बीच कई समितियों की लापरवाही उजागर हुई है। जिला स्तरीय गौधाम समिति की बैठक में अधूरे दस्तावेज और नियमों का पालन न करने के कारण 39 में से 34 प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया, जबकि केवल 5 समितियां ही तय मानकों पर खरी उतर सकीं।
कलेक्टोरेट में आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिला गौधाम समिति के अध्यक्ष धीरेंद्र दुबे ने की। बैठक में कुल 39 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें 19 नए प्रस्ताव शामिल थे। प्रारंभिक जांच में ही 12 प्रस्ताव अमान्य पाए गए, क्योंकि उनके पास जमीन के पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे और न ही गौवंश प्रबंधन की स्पष्ट योजना थी।
इन समितियों के प्रस्ताव भेजे गए रायपुर
कोटा ब्लॉक के लालपुर, कुरुवार, खैरा, गिरजावन मंदिर समिति और कनई की समितियों के प्रस्ताव बेहतर पाए गए। इन्हें अनुशंसा के लिए रायपुर भेजा गया है।
एनओसी और दस्तावेजों की कमी बनी बड़ी वजह
जांच में सामने आया कि कई समितियों के पास पंचायत की एनओसी नहीं थी, वहीं कुछ के पंजीयन और दस्तावेज अधूरे पाए गए। ऐसे सभी प्रस्तावों को निरस्त कर दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो समितियां तय शर्तें पूरी करेंगी, उनसे दोबारा आवेदन लिया जा सकता है।
गड़बड़ी करने वाली समितियां भी मैदान में
बैठक में यह भी सामने आया कि पहले गौठानों में गड़बड़ी के आरोप झेल चुकी कुछ समितियां भी गौधाम संचालन के लिए आवेदन कर रही हैं। कोटा ब्लॉक के ग्राम खैरा की भवानी महिला स्व सहायता समूह का आवेदन भी इसी कारण खारिज किया गया, क्योंकि उस पर पहले सोलर पैनल से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
तकनीकी सुधार का निर्णय
बैठक में लाखासार और जैतपुर गौधाम में ‘सेक्स सॉर्टेड सीमेन’ तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान शुरू करने का निर्णय भी लिया गया, ताकि गौवंश की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
गौरतलब है कि जिले में हर ब्लॉक में 10-10 गौधाम स्थापित करने की योजना है, यानी कुल 40 गौधाम प्रस्तावित हैं, लेकिन फिलहाल केवल लाखासार में ही एक गौधाम संचालित है।

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