रामनवमी पर बिलासपुर राममय: 53 वर्षों की परंपरा के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा शहर

प्रवीर भट्टाचार्य


बिलासपुर। चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर रामनवमी के दिन पूरा बिलासपुर शहर भक्ति और आस्था में डूबा नजर आया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। खासतौर पर व्यंकटेश मंदिर से निकलने वाली ऐतिहासिक शोभायात्रा ने पूरे शहर को राममय बना दिया।


53 वर्षों से निभ रही परंपरा


व्यंकटेश मंदिर से रामनवमी पर शोभायात्रा निकालने की परंपरा पिछले 53 वर्षों से निरंतर जारी है। इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ यह परंपरा निभाई गई। शोभायात्रा की तैयारियां दो दिन पहले से ही शुरू हो गई थीं। जीवंत झांकियों का निर्माण, भगवान श्रीराम के रथ और सिंहासन की सजावट, तथा विभिन्न धार्मिक प्रतीकों को भव्य रूप दिया गया।


दोपहर 12 बजे गूंजा जन्मोत्सव


शुक्रवार को जैसे ही घड़ी की सुइयां दोपहर 12 बजे पर मिलीं, मंदिरों में “भए प्रगट कृपाला दीनदयाला…” की मधुर ध्वनि गूंज उठी। भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव मनाया गया और भक्तों ने भाव-विभोर होकर आरती व पूजा-अर्चना की। घर-घर में भी रामलला का जन्मोत्सव मनाया गया।


भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ


शाम को व्यंकटेश मंदिर से भगवान हनुमान की अगुवाई में शोभायात्रा निकली। हजारों श्रद्धालु भगवा वस्त्र धारण कर, हाथों में ध्वज लिए, जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए। यह शोभायात्रा सदर बाजार, गोल बाजार, गांधी चौक, शिव टॉकीज चौक, पुराना बस स्टैंड और अग्रसेन चौक होते हुए पुनः मंदिर पहुंची।


करीब 5 किलोमीटर की इस यात्रा को पूरा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगा। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। साथ ही जल, शरबत और फल वितरण के लिए स्टॉल लगाए गए।
आकर्षण का केंद्र बनीं जीवंत झांकियां
शोभायात्रा में भगवान श्रीराम दरबार, व्यंकटेश भगवान, गोस्वामी तुलसीदास जी, रामचरितमानस, बघवा मंदिर, रामेश्वर शिवालय सहित कई जीवंत झांकियां शामिल रहीं। मारीच वध और रघुकुल की वीरता को दर्शाती झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं।


भजन मंडलियों की प्रस्तुति, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पंथी, रावत नाचा, करमा, ददरिया जैसे लोकनृत्यों ने माहौल को और अधिक भक्ति व उत्साह से भर दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो संपूर्ण भारतीय संस्कृति इस शोभायात्रा में समाहित हो गई हो।


महिलाओं की विशेष भागीदारी


शोभायात्रा में 108 कलश लेकर महिलाओं की भव्य उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।


नवरात्रि पर माता की विदाई और भंडारे


इसी दिन नवरात्रि की नवमी पर ज्योत कलश विसर्जन के साथ माता को विदाई दी गई। शहरभर में जगह-जगह भंडारे आयोजित किए गए, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम
महंत डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य के निर्देशन में निकली इस शोभायात्रा ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया। हर ओर “सियाराम मय सब जग जानी” का भाव दिखाई दिया। श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और हर कदम पर भगवान श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन हुआ।


इस भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भगवान श्रीराम केवल आस्था नहीं, बल्कि संस्कृति, मर्यादा और एकता के प्रतीक हैं। रामनवमी पर बिलासपुर में उमड़ा यह जनसैलाब और उत्साह आने वाले वर्षों तक याद किया

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