“लाखों खर्च के बाद भी बदहाल समलाई मंदिर गार्डन: घास गायब, लाइट नदारद, व्यवस्था पूरी तरह चौपट”

बनवारीलाल केंवट

बिलाईगढ़ |
नगर पंचायत बिलाईगढ़ के अंतर्गत स्थित समलाई मंदिर का एकमात्र गार्डन आज अपनी पहचान खोने की कगार पर पहुंच चुका है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गार्डन की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
गार्डन की देखरेख के लिए दो कर्मचारियों की नियुक्ति के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पूरे परिसर में आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे गार्डन की सारी हरियाली खत्म हो चुकी है। गायों द्वारा घास पूरी तरह चर ली गई है और पौधों की हालत भी बेहद खराब हो चुकी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पार्षद निधि से नगर में लाइट लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए थे, साथ ही लाखों रुपए की गार्डन के लिए सामग्री क्रय किया गया था।लेकिन हैरानी की बात यह है कि गार्डन में एक भी लाइट चालू हालत में नजर नहीं आती और न ही टूटे हुए झूलो का मरम्मत कराया गया। गार्डन की घास एवं पौधे पूरी तरह सुख गए है। खासकर नवरात्रि जैसे धार्मिक माहौल में जब श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है, तब भी यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है।
इतना ही नहीं, गार्डन की स्वच्छता व्यवस्था भी बदहाल है। सेप्टिक सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुका है और शौचालय जैसी जरूरी सुविधा भी यहां उपलब्ध नहीं है, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चैत-कुंवार माह में जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु समलाई मंदिर दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तो गार्डन की दुर्दशा प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोलती नजर आती है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्य कागजों में तो दिखते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद खराब है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार कौन है?
क्या नगर पंचायत इस ओर ध्यान देगी या फिर समलाई मंदिर का यह गार्डन यूं ही अपनी पहचान खोता रहेगा?
स्थानीय नागरिकों ने जल्द से जल्द गार्डन की मरम्मत, सफाई, लाइट व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

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