श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर, बिलासपुर में चैत्र नवरात्र एवं श्रीमद् देवी भागवत का भव्य आयोजन: दूसरे दिन हुआ दिव्य कथा का रसपान

नगर एवं प्रदेश के अद्वितीय आध्यात्मिक केंद्र श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर, सुभाष चौक, सरकण्डा में चैत्र वासंतिक नवरात्र के पावन अवसर पर श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का नौ दिवसीय संगीतमय आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किया जा रहा है। यह आयोजन गुरुवार, 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर शुक्रवार, 27 मार्च 2026 तक अनवरत चलेगा।
भगवान भूतनाथ चन्द्रमौलेश्वर की असीम अनुकम्पा और ब्रह्मलीन परमपूज्य श्री 108 स्वामी शारदानन्द सरस्वती जी महाराज के शुभ आशीर्वाद से यह महोत्सव विश्व शांति एवं जनकल्याणार्थ आयोजित किया जा रहा है। पीठाधिश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम दिन अभिजीत मुहूर्त में 119 श्री मनोकामना घृत अखण्ड ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए।
श्रीमद् देवी भागवत: द्वितीय दिवस का महात्म्य एवं कथा प्रसंग
महोत्सव के दूसरे दिन सुप्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य श्री मुरारीलाल त्रिपाठी ‘राजपुरोहित’ (कटघोरा-कोरबा) ने अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को देवी भागवत के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। दूसरे दिन की कथा मुख्य रूप से देवी तत्व, सृष्टि की उत्पत्ति और नारद मोह के प्रसंगों पर केंद्रित रही।
सृष्टि का उद्भव: आचार्य श्री ने बताया कि जब संपूर्ण ब्रह्मांड जलमग्न था और अंधकार व्याप्त था, तब केवल ‘आद्याशक्ति’ ही विद्यमान थीं। उन्हीं की इच्छा से त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की उत्पत्ति हुई। देवी भागवत के अनुसार, शक्ति ही समस्त चराचर जगत का आधार है।
नारद मोह एवं माया का प्रभाव: दूसरे दिन की कथा में देवर्षि नारद के अहंकार और भगवती की माया का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साक्षात विष्णु और ब्रह्मा भी भगवती की माया के अधीन हैं, तो साधारण मनुष्य की क्या बिसात? माया के प्रभाव से ही जीव संसार में बंधता है और ज्ञान के माध्यम से ही वह मुक्त हो सकता है।
श्रीमद् देवी भागवत का फल: व्यास पीठ से बताया गया कि इस महापुराण के श्रवण से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।


दैनिक पूजन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम
मंदिर के पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि नवरात्र के दौरान प्रतिदिन प्रातः काल श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया जा रहा है। साथ ही श्री महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त के षोडश मंत्रों द्वारा दुग्धाभिषेक संपन्न हो रहा है। देवी बगलामुखी का प्रतिदिन विभिन्न स्वरूपों में मनमोहक श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन अपराह्न 3:00 बजे से कथा का आयोजन किया जा रहा है।

श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर माँ भगवती की सेवा और कथा श्रवण का लाभ उठाने का अनुरोध किया है।

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