फ़िल्म समीक्षा: नए भारत की कूटनीति को बयां करती सशक्त फिल्मधुरंधर: द रिवेंज (Dhurandhar: The Revenge),

डॉ संजय अनंत


एक ऐसी फिल्म, जिसे आप दम साधे पूरी देखना चाहेंगे, कोई डिस्टरबेंस आप को पसंद नहीं आएगा , आप की नजरें रुपहले परदे पर ही टिकी होगी ,जिज्ञासा चरम पर होगी।
इसके बाद क्या ??
आप बस यही सोचेंगे, इसके सिवाय कुछ नहीं ..
यदि आप ने धुरंधर का पहला भाग देखा है, तो आप अनुभूत करेंगे कि ये उस से कहीं बेहतर है ,फिल्म की एडीटिंग गजब की है ,स्क्रिप्ट भी बेहतरीन और एक्टिंग तो ऐसी की, भाई सभी कलाकारों को सैल्यूट करने को जी करता है ।
ये भारतीय सिनेमा की सफल और बेहतरीन फ़िल्मों की सूची में अपना नाम अवश्य दर्ज कराएगी ।
तो साहब ऐसा है कि सन 2014 के बाद का भारत , अब केवल बदला नहीं लेता , घर में घुसकर मारता भी है।
मोदी जी , टीवी पर नोट बंदी की घोषणा करते है और बर्बाद पाकिस्तान होता है, ये फिल्मी शोशा नहीं ,हकीकत थी।
कराची में आई एस आई के इशारे पर बड़े पैमाने पर फेक करेंसी यानी नकली नोट बड़े पैमाने पर छपते और ये नेपाल या कश्मीर के रास्ते से भारत लाया जाता ।
ठीक है फिल्म की कहानी में कुछ नाटकीयता है, किन्तु इसके बाद भी ये फिल्म , कराची के इस सदी के प्रथम दशक की कहानी बयां करती है। रॉ के लोग पहले भी पाकिस्तान में सक्रिय थे , वे सूचना भेजते किन्तु उस पर कड़ी कार्यवाही नहीं होती थी , पर अब अजीत डोभाल देश की सुरक्षा संभाल रहे है , जो स्वयं कभी पाकिस्तान में भारत के जासूस रहे है , अब जो इनपुट हमारे एजेंट्स वहां से भेजते है , उस पर तुरंत कार्यवाही होती है ।
यूपी के माफिया अतीक अहमद , पाकिस्तान की संस्थाएं , दाऊद सब का गठबंधन सच्चाई है और यही इस फिल्म का आधार है।
बीते वर्ष में अनेक मोस्ट वांटेड आतंकी या उनके अन्नदाता जो पाकिस्तान में थे , अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा कत्ल कर दिए गए।
तो साहब ! यही है नया भारत..
जमील साहब यानी राकेश बेदी साहब की एक्टिंग तो कमाल की है , आर माधवन, सान्याल साहब के रूप में , संजय दत्त एस पी चौधरी के रूप में , फिल्म का हीरो रणवीर सिंह,सब ने अपने रोल के साथ न्याय किया है, अर्जुन रामपाल (मेजर इकबाल) क्रूरता घृणा चेहरे से झलकी , गजब की एक्टिंग..
दो कमियां भी बताते चलूं , अत्याधिक वीभत्स हिंसक सीन और कुछ अश्लील संवाद, इसलिए सेंसर बोर्ड ने ए सर्टिफिकेट दिया है , निर्देशक इसके बिना भी यदि फिल्म बनाते तो वो उतनी ही प्रभावशाली होती , इसकी जरूरत नहीं थी।
यह फिल्म निश्चित ही सुपरहिट होगी और भारतीय सिनेमा की बेहतरीन फ़िल्मों में अपना स्थान बनाएगी ।
निर्देशक और पटकथा लेखन ,दोनों आदित्य धर ने किया , वे निश्चित ही बधाई के पात्र है (और पुरस्कार के भी )
मेरी ओर से दस आठ
(दो अंक काटा है , अश्लील संवाद और वीभत्स हिसंक दृश्य के लिए )


डॉ.संजय अनंत ©
नेशनल वाइस प्रेसीडेंट
द फिल्म फाउंडेशन ट्रस्ट (भारत)

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