नारायणा ई-टेक्नो स्कूल पर 16 अनियमितताओं के आरोप, फीस बढ़ोतरी पर भी सवाल


बिलासपुर। शहर के नारायणा ई-टेक्नो स्कूल पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार स्कूल प्रबंधन पर शिक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए संचालन करने, अभिभावकों से अधिक शुल्क वसूलने और शिक्षकों के शोषण जैसे आरोप लगे हैं।
बिना अनुमति 8% फीस वृद्धि का आरोप
स्कूल पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि फीस फिक्सेशन कमेटी की अनुशंसा के बिना ही 8 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी गई। नियमों के अनुसार किसी भी निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले संबंधित समिति की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
स्थानीय बैंक खाते नहीं, बाहर भेजी जा रही फीस
दस्तावेजों के मुताबिक, स्कूल की प्रदेश में संचालित शाखाओं का कोई स्थानीय बैंक खाता नहीं है। अभिभावकों से ली गई फीस सीधे मुंबई और नेल्लोर स्थित नारायणा एजुकेशन सोसाइटी के खातों में क्यूआर कोड के जरिए जमा कराई जा रही है। इसे वित्तीय पारदर्शिता और स्थानीय नियामकीय व्यवस्था का उल्लंघन माना जा रहा है।
शिक्षकों को कमीशन और महंगे सामान का आरोप
स्कूल प्रबंधन पर शिक्षकों को प्रति छात्र 2000 रुपये एडमिशन कमीशन देने का प्रलोभन देने का भी आरोप है। इसके अलावा यूनिफॉर्म और किताबें महंगे दामों पर उपलब्ध कराने की शिकायत भी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि स्कूल का संबंध एनस्पिरा नामक व्यावसायिक संस्था से है, जो यूनिफॉर्म और किताबें तैयार कर स्कूलों को उपलब्ध कराती है और इन्हें अभिभावकों को ऊंची कीमत पर बेचा जाता है।
रजिस्ट्रेशन और मान्यता को लेकर भी सवाल
आरोप है कि रायपुर शाखा के करीब 250 छात्रों का पंजीयन बिलासपुर से किया गया। वहीं, स्कूल ने खुद को सीबीएसई से मान्यता प्राप्त बताकर अभिभावकों से फीस वसूली, जबकि सीनियर सेकेंडरी स्तर की मान्यता 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए बाद में प्रदान की गई।
कुल 16 अनियमितताओं की जांच के निर्देश
जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बिना फीस फिक्सेशन कमेटी की अनुमति के फीस बढ़ाना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि स्कूल में सामने आई सभी अनियमितताओं की विस्तृत जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत
वहीं स्कूल के प्रिंसिपल प्रभाष चंद्र झा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि फीस फिक्सेशन कमेटी के गठन के लिए पहले ही शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया था और जवाब न मिलने पर रिमाइंडर भी भेजा गया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल सरकार के सभी नियमों का पालन करते हुए संचालित किया जा रहा है।

नारायणा ई-टेक्नो स्कूल पर लगे आरोपों ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और फीस नियंत्रण व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जिला प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और स्कूल प्रबंधन पर क्या कार्रवाई होगी।

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