

बिलासपुर। घर में घुसकर महिला पर गोली चलाने के वर्ष 2001 के बहुचर्चित मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में आंशिक संशोधन करते हुए आरोपियों की सजा बरकरार रखी है। हालांकि कोर्ट ने 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को घटाकर 7 वर्ष कर दिया है, जबकि जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है।
मामले के अनुसार बिलासपुर के कश्यप कॉलोनी निवासी सुनीता तिवारी अपने घर में सुच्चानंद वाधवानी के साथ चाय पी रही थीं। इसी दौरान आरोपी रामकृष्ण वैश्य अपने साथियों के साथ जबरन घर में घुस आया और मकान के कागजात को लेकर सुच्चानंद वाधवानी से विवाद करने लगा। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
इस दौरान सुनीता तिवारी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, जिस पर मुख्य आरोपी रामकृष्ण वैश्य ने देसी कट्टे से उन पर गोली चला दी। गोली सुनीता तिवारी की जांघ के ऊपरी हिस्से में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। आरोपियों ने दूसरी गोली भी चलाई, जो सुनीता तिवारी और सुच्चानंद वाधवानी के बीच से निकलकर दीवार में जा धंसी।
इस मामले में बिलासपुर के अपर सत्र न्यायाधीश ने 3 अगस्त 2005 को आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
घायल गवाह का बयान विश्वसनीय
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि घायल गवाह का बयान अत्यंत विश्वसनीय होता है और उसे आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से यह स्पष्ट है कि आरोपियों ने जानलेवा हमला किया था।
सजा कम, जुर्माना बढ़ाया
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत दी गई 10 वर्ष की सजा को घटाकर 7 वर्ष कर दिया। वहीं धारा 307 के तहत आरोपियों पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बढ़ी हुई जुर्माने की राशि पीड़िता सुनीता तिवारी को मुआवजे के रूप में दी जाए। साथ ही आरोपियों को आठ सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है।
दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अपील लंबित रहने के दौरान आरोपी झल्लू और मुन्ना वर्मा की मृत्यु हो चुकी है। इसके चलते उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया है।
