

बिलासपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विजय टांडे और कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और गबन जैसे गंभीर आरोपों की शिकायत की गई है। हालांकि आर.पी. आदित्य ने फिलहाल केवल अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के निर्देश दिए हैं।
संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर ने 6 मार्च को आदेश जारी कर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। इस टीम में जांजगीर-चांपा के डीईओ अशोक सिन्हा, जेडी कार्यालय बिलासपुर के जे.के. शास्त्री और बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक को शामिल किया गया है। टीम को निर्देश दिया गया है कि शिकायतों की जांच कर 7 दिनों के भीतर अपना प्रतिवेदन और स्पष्ट अभिमत प्रस्तुत करें।
कोटा बीईओ रहते वेतन गड़बड़ी के आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विजय टांडे के कोटा बीईओ रहते हुए भृत्य देवेंद्र कुमार पालके को वेतन और भत्तों के भुगतान में बड़ी वित्तीय अनियमितता हुई। आरोप है कि पालके को 4,95,420 रुपये वेतन और 3,54,000 रुपये वर्दी धुलाई भत्ता दिया गया। उस समय भृत्य को गोपनीय मेकर और चेकर आईडी देकर वित्तीय कार्यों में शामिल किया गया, जिससे वेतन के माध्यम से लाखों रुपये की निकासी हुई।
इस मामले में भृत्य और एक अन्य के खिलाफ कोटा थाने में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। वहीं संचालनालय कोष एवं लेखा के आदेश पर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी द्वारा की गई जांच में तत्कालीन बीईओ और वर्तमान डीईओ विजय टांडे पर कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। इसके अलावा वर्तमान बीईओ नरेंद्र प्रसाद मिश्रा और लेखा शाखा प्रभारी नवल सिंह पैकरा की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जांच टीम पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता अंकित गौरहा ने जांच समिति के गठन पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पहले भी कोटा बीईओ रहते हुए टांडे पर एक महिला ने मृत शिक्षक पति के लंबित भुगतान के बदले 1.35 लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। उस मामले की जांच समिति में भी बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक शामिल थे और जांच के बाद टांडे को क्लीन चिट दे दी गई थी। इसी कारण वर्तमान जांच टीम में उनके शामिल होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
डीईओ ने भी बाबू के खिलाफ बिठाई जांच
इधर आरोप-प्रत्यारोप के बीच डीईओ ने विभाग के एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ भी जांच के निर्देश दिए हैं। डीईओ द्वारा जारी पत्र में कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से समाज सेवा संघ की शिकायत का हवाला देते हुए सहायक ग्रेड-2 विकास तिवारी पर फर्जी तरीके से अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के आरोपों की 15 दिन के भीतर जांच करने को कहा गया है। इसके लिए राजेंद्र नगर स्कूल के प्राचार्य एम.एल. पटेल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है।
ये भी लगाए गए हैं आरोप
शिकायत में डीईओ कार्यालय पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें फर्जी अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति के लिए लाखों रुपये की मांग, शिकायत करने वाले कर्मचारियों को निलंबित करने का दबाव, कार्यालय अटैचमेंट के नाम पर हर माह 2 से 10 हजार रुपये तक अवैध वसूली, पति-पत्नी दोनों के शासकीय सेवा में होने के बावजूद फर्जी शपथ पत्र के आधार पर नियुक्ति और 10 लाख रुपये लेकर दूसरी पत्नी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने जैसे आरोप शामिल हैं।
इस संबंध में संयुक्त संचालक शिक्षा आर.पी. आदित्य का कहना है कि उन्हें पहले अन्य शिकायतें प्राप्त नहीं हुई थीं। अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित शिकायत मिलने के बाद जांच समिति गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की
