शीतला अष्टमी पर धार्मिक मान्यताओं के साथ की गई मां शीतला की पूजा-अर्चना, शंकर नगर और हेमू नगर में तीन दिवसीय आयोजन


बिलासपुर। हिंदू धर्म में माता शीतला की पूजा विशेष आस्था और श्रद्धा के साथ की जाती है। मान्यता है कि मां शीतला रोगों, विशेषकर चेचक और संक्रामक बीमारियों से रक्षा करती हैं और परिवार को स्वस्थ एवं सुखी रखती हैं। शीतला माता की पूजा मुख्य रूप से होली के बाद आने वाली शीतला सप्तमी या अष्टमी के दिन की जाती है। कई स्थानों पर इसे बसौड़ा या बसोरा भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता को ठंडा भोजन प्रिय होता है, इसलिए पूजा के एक दिन पहले घर में भोजन बनाकर रख लिया जाता है और पूजा के दिन वही बासी या ठंडा भोजन माता को भोग लगाकर परिवार के लोग ग्रहण करते हैं। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता।


पूजा के दिन सुबह महिलाएं स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर शीतला माता के मंदिर या घर में स्थापित माता की प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना करती हैं। माता को ठंडे पकवान जैसे पूरी, पुआ, हलवा, दही, चने और अन्य पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति की कामना की जाती है।


धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला गधे पर सवार होकर हाथ में झाड़ू, कलश और सूप लिए रहती हैं। झाड़ू से वह रोग और अशुद्धियों को दूर करती हैं, जबकि कलश में अमृत रूपी जल से रोगों को शांत करती हैं। इसलिए इस दिन साफ-सफाई और स्वच्छता का भी विशेष महत्व माना जाता है।


ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं सामूहिक रूप से मंदिरों में जाकर पूजा करती हैं और माता के भजन-कीर्तन भी होते हैं। माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई शीतला माता की पूजा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और बीमारियों से रक्षा होती है।


शीतला अष्टमी पर शहर में विशेष आयोजन, शंकर नगर में 76वें वर्ष मां शीतला की पूजा


शीतला अष्टमी के अवसर पर शहर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मां शीतला की पूजा-अर्चना की जा रही है। शंकर नगर शीतला समिति द्वारा इस वर्ष भी विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। शंकर नगर में पिछले 76 वर्षों से मां शीतला की पूजा की परंपरा निभाई जा रही है और इस बार भी इसे भव्य रूप से मनाया जा रहा है।
समिति द्वारा मंगलवार को पंडाल में मां शीतला की प्रतिमा स्थापित की गई। शीतला अष्टमी के दिन सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं ने माता को ठंडे पकवानों का भोग अर्पित कर पूजा-अर्चना की और पुष्पांजलि अर्पित की। मान्यता के अनुसार इस दिन माता को ठंडा भोजन अर्पित करने और व्रत-पूजा करने से चेचक, दाह, पित्त ज्वर और आंखों से संबंधित रोगों से मुक्ति मिलती है।


पर्व के अवसर पर 12 और 13 मार्च को 16 प्रहर हरि नाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। इस संकीर्तन में पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा से आए कलाकार भक्ति संगीत की प्रस्तुति देंगे। वहीं 14 मार्च को माता को नगर भ्रमण कराया जाएगा। हालांकि शनिवार होने के कारण उस दिन माता की विदाई नहीं होगी। समिति के अनुसार 15 मार्च को सुबह 10:30 बजे माता की विधिवत विदाई और विसर्जन किया जाएगा।
आपको बता दें कि शहर में सबसे पहले शंकर नगर में ही मां शीतला की पूजा शुरू हुई थी और इस वर्ष यह आयोजन अपने 76वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। धार्मिक मान्यताओं के साथ इसका वैज्ञानिक महत्व भी माना जाता है। दो ऋतुओं के संधिकाल में खान-पान को लेकर सावधानी बरतने का संदेश भी इस पर्व के माध्यम से दिया जाता है।


इधर शहर के अन्य क्षेत्रों जैसे हेमू नगर, विनोबा नगर, सरकंडा और सिम्स परिसर स्थित श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में भी मां शीतला की पूजा-अर्चना की गई। यहां भी बाहर से आए कलाकारों द्वारा भक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
वहीं हेमू नगर स्थित दुर्गा पंडाल में भी बंगाली परंपरा के अनुसार मां शीतला की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने ढाक की थाप के बीच माता को भोग अर्पित कर पुष्पांजलि दी। यहां भी तीन दिवसीय धार्मिक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 16 प्रहर हरि नाम संकीर्तन शामिल है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में क्षेत्र के बंगाली भाषी श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।

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