

बिलासपुर टिकरापारा स्थित बंगो भवन में छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी के तत्वावधान में 239वाँ सलील चौधरी स्मृति बसंत साहित्य सभा सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। बसंत उत्सव और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत, कविता, नाटक और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अकादमी के गीत की सामूहिक प्रस्तुति से हुई, जिसमें अकादमी के सदस्यों ने भाग लिया।

संगीत प्रस्तुति में श्री निहार रंजन मल्लिक, शुभ्रांशु शेखर घोष, प्रबाल मुखर्जी, असित दत्त, देवाशीष सरकार, अचिन्त्य कुमार बोस तथा प्रतिमा पाल ने अपनी स्वरांजलि प्रस्तुत की।
कविता पाठ में नमिता घोष, डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी, रूपा राहा, अशोक कुंडु तथा आयुष प्रमाणिक ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी ने कविता पाठ के साथ-साथ संक्षिप्त वक्तव्य भी दिया, जिसमें उन्होंने सलील चौधरी के साहित्य और संगीत सृजन के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नाटक “खगेन कहाँ” था। इस नाटक के लेखक, निर्देशक और अभिनेता असित बरन दास थे। इसके अलावा अभिनय में डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक, उमा दास, श्रीमती मल्लिका सरकार, प्रबाल मुखर्जी और पार्थसारथी बोस ने भाग लिया।
नृत्य की विशेष प्रस्तुति गोपा दासगुप्ता द्वारा तैयार की गई। इस मनमोहक नृत्य में संतना दासगुप्ता, श्रुति दत्त, तनिमा राय, पूजा पालित, पूजा परमानिक, मौमिता चक्रवर्ती तथा आयुषी पालित ने भाग लिया।
कार्यक्रम में सामूहिक गीत “ओ रे गृहवासी” पर अकादमी के सभी सदस्य-सदस्याओं ने सामूहिक नृत्य और प्रस्तुति दी, जिसके लिए विशेष तैयारी की गई थी।
पूरे कार्यक्रम का संचालन राजा दासगुप्ता ने किया। उन्होंने सलील चौधरी के सृजन को केंद्र में रखकर बसंत उत्सव और महिला दिवस के संदर्भ में कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति की।
इस आयोजन में प्रबाल मुखर्जी और गोपा दासगुप्ता का विशेष सहयोग रहा।
छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी की ओर से श्रीमती नमिता घोष, डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी, श्रीमती मल्लिका सरकार, श्री अशोक कुमार कुंडु, श्रीमती मोनिका घोष तथा श्रीमती रूपा रहा को विशेष सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।
इसके अतिरिक्त मीनू दास, देविका दास, मेरिना घोष, प्रवीर घोष, सुब्रत चट्टोपाध्याय, छंदा घोष, झरना चट्टोपाध्याय, रेवा चौधरी, भक्तिमय चौधरी, वंदना राय, कृष्णा गोस्वामी, सुमिता दासगुप्ता और गोपा बागची को भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि श्रीमती नमिता घोष और डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी अस्वस्थ होने के बावजूद कार्यक्रम में सक्रिय रूप से उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।
अंत में, कार्यक्रम की सफलता के लिए छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी के सभी सदस्य, दर्शक, श्रोता, कलाकार, आमंत्रित नृत्य कलाकार तथा उनके परिवारजनों के सहयोग की सराहना की गई।
कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण और सांस्कृतिक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
