

बिलासपुर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए चार नई महत्वपूर्ण ब्लड जांचें शुरू कर दी हैं। अब मैग्नेशियम, फास्फोरस, गामा-जीटी और माइक्रो प्रोटीन की जांच अस्पताल में ही उपलब्ध होगी। इससे किडनी, लिवर, हार्ट और मेटाबॉलिक बीमारियों की पहचान पहले से अधिक तेजी और सटीकता से हो सकेगी।
अब तक इन जांचों के लिए मरीजों को निजी लैब या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। नई सुविधा सरकारी दरों पर उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को विशेष राहत मिलेगी। बिलासपुर संभाग के साथ-साथ आसपास के जिलों से आने वाले मरीज भी अब स्थानीय स्तर पर ही उन्नत जांच का लाभ उठा सकेंगे।
हड्डियों और किडनी के लिए फास्फोरस जांच
फास्फोरस शरीर में हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए आवश्यक तत्व है। किडनी रोग, थायरॉयड असंतुलन और विटामिन-डी की कमी की स्थिति में इसका स्तर प्रभावित हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में यह जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। सिम्स में यह सुविधा शुरू होने से नेफ्रोलॉजी व मेडिसिन विभाग को उपचार तय करने में सहूलियत मिलेगी।
दिल और नसों की सेहत के लिए मैग्नेशियम टेस्ट
शरीर में मैग्नेशियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन, दिल की धड़कन में अनियमितता, कमजोरी और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। अब यह जांच अस्पताल में ही उपलब्ध होने से हृदय रोगियों और गंभीर मरीजों की बेहतर मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।
गामा-जीटी से लिवर रोगों की पहचान
गामा-जीटी (Gamma-GT) एक एंजाइम है, जो लिवर और पित्त नलिकाओं से जुड़ी बीमारियों की पहचान में सहायक होता है। पहले यह जांच बाहरी लैब में करानी पड़ती थी, लेकिन अब सिम्स में ही त्वरित रिपोर्ट मिलने से इलाज में देरी नहीं होगी।
माइक्रो प्रोटीन से किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत
माइक्रो प्रोटीन जांच से किडनी की शुरुआती क्षति का पता लगाया जा सकता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। समय रहते पहचान होने से किडनी फेल होने जैसी गंभीर स्थिति को रोका जा सकता है।
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि बायोकेमिस्ट्री विभाग में ये चारों नई जांचें शुरू कर दी गई हैं। इससे पूरे संभाग के मरीजों को लाभ मिलेगा और उन्हें अब उच्च स्तरीय जांच के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
