जिला अधिवक्ता संघ बिलासपुर का आरोप: जमानत के बदले 5 हजार की मांग, कलेक्टर से शिकायत


बिलासपुर। जिला अधिवक्ता संघ के सचिव रवि कुमार पांडेय ने सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत एवं न्यायालय की कथित स्टेनो (रीडर) जूही सोम पर जमानत देने के नाम पर 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले की शिकायत कलेक्टर संजय अग्रवाल से की गई है और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इधर, शिकायत के बाद कर्मचारियों से प्रारंभिक पूछताछ भी शुरू कर दी गई है।
धारा 151 के मामले में जमानत को लेकर विवाद
शिकायत के अनुसार, संघ के एक सदस्य अधिवक्ता के पक्षकार रोहित कश्यप को 29 जनवरी 2026 को सिविल लाइन पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत थाने में बैठाया था। 30 जनवरी को उसे सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश किया गया। अधिवक्ता जमानत आवेदन, स्वयं का मुचलका तथा सक्षम जमानतदार के साथ आवश्यक दस्तावेज लेकर न्यायालय पहुंचे थे।
आरोप है कि न्यायालय की ओर से कहा गया कि इस न्यायालय में दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती और जमानत के लिए 5 हजार रुपये देने होंगे। शिकायत में उल्लेख है कि राशि नहीं देने पर जमानत निरस्त कर अभियुक्त को जेल भेजने की बात कही गई। यह भी आरोप लगाया गया है कि फोन पर मजिस्ट्रेट से बातचीत के बाद ही यह संदेश दिया गया कि राशि मिलने पर जमानत दी जाएगी।
पैसे नहीं देने पर जेल, अगले दिन जमानत
अधिवक्ता संघ के सचिव का कहना है कि सक्षम जमानतदार होने के बावजूद पैसे नहीं देने पर आरोपी को जेल भेज दिया गया, जबकि धारा 151 जमानती प्रकृति की है। शिकायत में दावा किया गया है कि 31 जनवरी को 5 हजार रुपये देने के बाद रोहित कश्यप को जमानत दी गई।
प्रशासन ने शुरू की जांच
शिकायत के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की है। जानकारी के अनुसार, उस दिन न्यायालय में आए सभी मामलों का विवरण कलेक्टर को सौंपा गया है तथा कर्मचारियों ने अपना पक्ष भी प्रस्तुत किया है।
कर्मचारियों का पक्ष
मामले में सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत का पक्ष नहीं मिल सका। शिकायतकर्ता ने जूही सोम को स्टेनो बताया है, जबकि उन्होंने स्वयं को रीडर बताया है। जूही का कहना है कि उस दिन न्यायालय में एक ही प्रकृति के चार मामले आए थे, जिनमें आरोपियों ने गोगो बेचने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने रिश्वत मांगने के आरोप को निराधार बताया है।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और प्रशासन की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।

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