

बिलासपुर। निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की बिलासपुर शाखा द्वारा हेमू नगर स्थित रामकृष्ण मंदिर के सभा भवन में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में संगीत, नृत्य, कविता पाठ, गीति आलेख्य एवं कौतुक अभिनय के माध्यम से मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात सम्मेलन का गीत “मोदेर गरोब मोदेर आशा” की कोरस प्रस्तुति दी गई। अध्यक्ष अजय गांगुली ने अपने उद्बोधन में कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके बाद “मानुषेर भाषा” शीर्षक गीति आलेख्य की प्रस्तुति हुई, जिसमें भाष्य असित बरन दास एवं डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक ने दिया। निहार रंजन मल्लिक के संगीत निर्देशन में समूह गायन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें निहार, अचिन्त्य कुमार बोस, शिल्पी सी., मल्लिका सरकार, श्रावणी दत्त, प्रबाल मुखर्जी, देवाशीष सरकार, सौरभ चक्रवर्ती, मौमिता चक्रवर्ती, अनिता गोलदार, स्वागता चौधरी, असित, डॉ. सोमा, उमा दास एवं रेवा चौधरी ने सहभागिता की। तबला संगत जय डे ने की।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती श्रावणी दत्त को “राम जीवन मुखोपाध्याय संगीत एवं सांगठनिक सम्मान” से सम्मानित किया गया। उन्हें मेमेंटो, उत्तरीय, पुष्पगुच्छ एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
श्रीमती गोपा दासगुप्ता ने वर्ष 1983 की उस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया, जब सम्मेलन की बिलासपुर शाखा द्वारा सर्वभारतीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सहित देश के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल हुए थे।
कविता पाठ रुपा राहा, असित बरन दास एवं सौभिक दास गुप्ता ने किया। कौतुक अभिनय की प्रस्तुति पार्थ बसु ने दी, जबकि नृत्य प्रस्तुति कुमारी अर्निमा पाल द्वारा दी गई। एकल संगीत की प्रस्तुतियां तुहिन चटर्जी, अचिन्त्य कुमार बोस, अर्निमा पाल, स्वागता चौधरी, श्रावणी दत्त एवं प्रबाल मुखर्जी ने दीं। कोरस गीत में मौसमी चक्रवर्ती, रुपा राहा, रेखा दास सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में असित बरन दास एवं डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक ने अपने विचार रखे। आयोजन में डॉ. सुदिप्तो दत्त सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
