लकवा से हुई मौत को बनाया सर्पदंश, फर्जी दस्तावेजों से हड़पे 4 लाख, महिला समेत सहयोगियों पर धोखाधड़ी और कूटरचना का केस दर्ज, पुराने मामलों की भी होगी जांच


तखतपुर। छत्तीसगढ़ शासन की आपदा राहत योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। तखतपुर क्षेत्र के ग्राम चना डोंगरी में लकवा (पैरालिसिस) से हुई एक व्यक्ति की मृत्यु को सर्पदंश बताकर 4 लाख रुपये का मुआवजा हड़पने का मामला उजागर हुआ है। जांच में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राजस्व दस्तावेजों में कूटरचना का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।
बीमारी से हुई मौत, कागजों में बना सर्पदंश
जांच में सामने आया कि ग्राम चना डोंगरी निवासी पुरुषोत्तम श्रीवास की कुछ समय पूर्व लकवा की बीमारी के चलते उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। नियमानुसार बीमारी से हुई मृत्यु पर आपदा राहत योजना के तहत मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
आरोप है कि एक सक्रिय बिचौलिया गिरोह ने मृतक की पत्नी उर्वशी श्रीवास से संपर्क कर कागजों में मृत्यु का कारण सर्पदंश दर्शाने का लालच दिया। इसके बाद संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासन से 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत करवा ली गई।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाली हस्ताक्षर
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने कूटरचित पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की। राजस्व विभाग के दस्तावेजों और मार्ग क्रमांक में भी हेराफेरी की गई। जांच में तहसीलदार के हस्ताक्षर तक कथित रूप से फर्जी पाए गए।
मुआवजा राशि आहरित होने के बाद जब मामले में विसंगतियां सामने आईं और शिकायत प्रशासन तक पहुंची, तो बिलासपुर कलेक्टर के निर्देश पर तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई। राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के मूल रिकॉर्ड से मिलान करने पर फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। मेडिकल रिकॉर्ड ने स्पष्ट किया कि मृत्यु का कारण सर्पदंश नहीं, बल्कि गंभीर लकवा था।
तहसीलदार की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
तखतपुर तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने इसे शासन के साथ धोखाधड़ी और गरीबों के अधिकारों पर डाका बताया। उनकी लिखित शिकायत पर थाना प्रभारी विवेक पांडेय के नेतृत्व में तखतपुर थाना पुलिस ने आरोपी उर्वशी श्रीवास और उसके सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (कूटरचना व जाली दस्तावेजों का उपयोग) सहित शासकीय राशि के दुरुपयोग की धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
संगठित सिंडिकेट की आशंका
प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो अस्पताल से लेकर तहसील कार्यालय तक फर्जी दस्तावेज तैयार करने में माहिर है।
प्रशासन अब तखतपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले दो-तीन वर्षों में स्वीकृत सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों की भी गोपनीय जांच कराने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि गहन ऑडिट में ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं।
असली पीड़ितों के हक पर चोट
यह फर्जीवाड़ा न केवल शासकीय राजकोष को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि उन वास्तविक पीड़ित परिवारों के अधिकारों पर भी चोट है, जो आपदा राहत की राशि के लिए कार्यालयों के चक्कर काटते रहते हैं।
पुलिस ने मामले में साक्ष्य संकलन तेज कर दिया है और अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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