
बिलासपुर। नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बन रही 11 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना की धीमी रफ्तार से शहरवासियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में डामरीकरण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि जनवरी की तय डेडलाइन समाप्त हो चुकी है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस सड़क निर्माण के लिए 31 दिसंबर को वर्क ऑर्डर जारी किया था। विभागीय अधिकारियों ने तैयारी के लिए एक महीने का समय मांगा था, जो जनवरी में पूरा हो गया। इसके बावजूद फरवरी आधा बीतने के बाद भी मुख्य सड़क पर डामरीकरण का काम प्रारंभ नहीं हुआ है।
अब डिवाइडर का दिया जा रहा तर्क
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के अंतर्गत केवल जूना बिलासपुर और लालखदान–मस्तूरी सेक्शन में ही डब्ल्यूएमएम (वेट मिक्स मैकडम) का उपयोग किया जाएगा, जबकि शेष हिस्से में डामरीकरण किया जाएगा। फिलहाल जूना बिलासपुर क्षेत्र में नाली निर्माण का कार्य चल रहा है।
अधिकारियों का तर्क है कि डामरीकरण का काम अब बारिश के बाद शुरू किया जाएगा। तब तक नेहरू चौक से डिवाइडर निर्माण का कार्य किया जाएगा। हालांकि, इस दलील से लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही।
आम जनता को झेलनी पड़ रही परेशानी
नाली निर्माण के नाम पर जगह-जगह खुदाई कर मलबा सड़क पर ही डाल दिया गया है, जिससे धूल उड़ रही है और गड्ढों से आवागमन प्रभावित हो रहा है। राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना जाम, धूल और खराब सड़क का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने पहले आश्वासन दिया था कि “एक-दो दिन में काम शुरू हो जाएगा”, लेकिन अब डिवाइडर निर्माण का बहाना बनाकर डामरीकरण टाला जा रहा है।
विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल
लगातार हो रही देरी और स्पष्ट कार्ययोजना के अभाव ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही मुख्य सड़क पर डामरीकरण शुरू होगा, लेकिन फिलहाल राहत की कोई ठोस समयसीमा सामने नहीं आई है।
जब तक निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ता, तब तक नागरिकों को धूल, गड्ढों और ट्रैफिक अव्यवस्था की समस्या झेलनी पड़ेगी।
