अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे कोटा जंगल में दो शावकों के साथ घूम रही बाघिन


बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे वन विकास निगम कोटा के जंगल में एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ विचरण कर रही है। कोटा-बेलगहना क्षेत्र के जंगल में स्थित तालाब के पास गीली मिट्टी में 50 से 60 पगमार्क मिले हैं। इनमें बाघिन के बड़े पंजों के साथ छोटे शावकों के निशान भी स्पष्ट दिखाई दिए हैं।
सूचना मिलते ही एटीआर प्रबंधन, कोटा रेंज और वन विकास निगम का मैदानी अमला मौके पर पहुंचा। पगमार्क के आधार पर अधिकारियों ने बाघिन के साथ दो शावकों की मौजूदगी का अनुमान लगाया है। शावकों की उम्र लगभग 4 से 5 माह बताई जा रही है। हालांकि अब तक बाघिन और शावकों का प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हुआ है।
शावकों की कम उम्र को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। वर्तमान में एटीआर में वन्यप्राणी गणना का कार्य भी जारी है, जिसके चलते जंगलों में गश्त बढ़ाई गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मैदानी अमले को लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।


जोधपुर जू ने कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क से मांगा लकड़बग्घा का जोड़ा


एनीमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जोधपुर जू (राजस्थान) ने कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क से लकड़बग्घा (मेल-फीमेल) की एक जोड़ी की मांग की है। इसके बदले भेड़िया का जोड़ा देने की पेशकश की गई है। पिछले सप्ताह जोधपुर जू की ओर से कानन पेंडारी प्रबंधन को इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है।
बताया जा रहा है कि कानन पेंडारी में भेड़िया प्रजाति वर्तमान में उपलब्ध नहीं है, ऐसे में इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जा सकता है। यदि एक्सचेंज प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो जू में नई प्रजाति शामिल होने से दर्शकों के लिए आकर्षण बढ़ेगा।
कानन पेंडारी में लकड़बग्घा पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। हाल ही में यहां एक सफेद शेर भी लाया गया है, क्योंकि नर सफेद शेर की कमी के चलते कुनबे को बढ़ाने की आवश्यकता थी। हालांकि प्रबंधन ने फिलहाल बाघ, तेंदुआ, लॉयन और भालू की ब्रीडिंग पर रोक लगा रखी है।

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