
कानपुर

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक अधूरे वीडियो को लेकर बैंक कर्मचारी आस्था सिंह को जातिगत विवाद के केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही है, जबकि पूरा मामला सामने आने के बाद स्पष्ट होता है कि यह न तो योजनाबद्ध जातिवादी घटना थी और न ही किसी समुदाय विशेष के विरुद्ध टिप्पणी, और ना ही किसी ग्राहक से अभद्रता बल्कि एक सामान्य विवाद को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। और घटना करीब एक महीने पुरानी है जिसे जानबूझकर अभी वायरल किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 जनवरी 2026 को ऋषि त्रिपाठी की पत्नी ऋतु त्रिपाठी, जो कानपुर के पनकी शाखा एचडीएफसी बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत थीं, अपने पद से रिजाइन कर रिलीव होने आई थीं। रिलीविंग से पूर्व कैशियर होने के कारण आवश्यक हिसाब-किताब और औपचारिकताओं में समय लग रहा था, जबकि उनका परिवार आधे घंटे में प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बना रहा था।
इसी दौरान बैंक कर्मचारी आस्था सिंह वॉशरूम से बाहर निकल रही थीं और अपनी साड़ी ठीक कर रही थीं, तभी ऋषि त्रिपाठी की बहन द्वारा उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी गई। इस पर दोनों के बीच हल्की बहस हुई। बाद में इसी बात को नमक-मिर्च लगाकर ऋषि त्रिपाठी को बताया गया, जिसके बाद वे बैंक का वर्किंग टाइम पूरा होने के बाद करीब शाम 4:30 बजे गुस्से में बैंक परिसर में पहुंचे।
आरोप है कि ऋषि त्रिपाठी ने आस्था सिंह के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें “अकड़”, “हेकड़ी निकाल दूंगा”, “गर्मी उतार दूंगा” जैसे शब्दों से अपमानित किया। लगातार अपमानजनक व्यवहार से आक्रोशित होकर आस्था सिंह ने अपनी पहचान बताते हुए कहा कि “मैं ठाकुर हूं, बक-बक मत करना”—जिसे बाद में जातिवादी बयान बताकर प्रचारित किया गया।
आस्था सिंह का कहना है कि यदि वे अपनी जाति का उल्लेख न करतीं, तो यही लोग कहते कि “एक महिला कर्मचारी ने मनचले को सबक सिखा दिया”। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आत्मसम्मान में दिया गया जवाब था, न कि किसी जाति के विरुद्ध टिप्पणी।

सबसे अहम बात यह है कि पूरी घटना बैंक के CCTV कैमरों में रिकॉर्ड है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि विवाद कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ। बावजूद इसके, एक महीने बाद अधूरा वीडियो क्लिप वायरल कर दिया गया, जिससे सच्चाई छिप गई और अफवाहों को हवा मिल गई।
सूत्रों के अनुसार, ऋषि त्रिपाठी का रिकॉर्ड पहले से ही बैंक कर्मचारियों से विवाद करने का रहा है, क्योंकि उनकी पत्नी उसी बैंक में कार्यरत थीं और उनका लगातार आना-जाना होता था।
आस्था सिंह ने अपील की है कि “कौआ कान ले गया” जैसी अफवाहों पर विश्वास करने से पहले लोग पूरे तथ्य और CCTV फुटेज देखें। उन्होंने कहा कि यह मामला जाति का नहीं, बल्कि एक महिला कर्मचारी के सम्मान और कार्यस्थल की गरिमा से जुड़ा है।
फिलहाल, अधूरे तथ्यों के आधार पर किसी की छवि धूमिल करना न केवल अनुचित है, बल्कि न्याय की मूल भावना के भी विरुद्ध है।
