

बिलासपुर।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत जिले में सी कैटेगरी के मतदाताओं की सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं, जिन मतदाताओं के पिता के नाम या उम्र में गड़बड़ी पाई गई है, उनके लिए नोटिस भी अब तक जारी नहीं हो सके हैं। चुनाव आयोग से निर्देश मिलने के बाद ही नोटिस प्रिंट कर संबंधित मतदाताओं को भेजे जाएंगे।
एसआईआर की प्रक्रिया के चलते बीते तीन माह से कर्मचारी और मतदाता दोनों ही परेशान हैं। 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन प्रस्तावित है, ऐसे में उससे पहले लोगों को राहत मिलने की संभावना कम ही है।
जिले में 16 लाख से अधिक मतदाताओं तक पहुंचने के लिए प्रशासन ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की ड्यूटी लगाई थी। उन्हें मतदाताओं से संपर्क कर एसआईआर फॉर्म भरवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, शुरुआत में ही प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। कई बीएलओ को यह स्पष्ट नहीं था कि कौन से दस्तावेज स्वीकार्य हैं और कौन से नहीं। एसआईआर की समय-सीमा बार-बार बढ़ाई गई और अंततः 18 दिसंबर तक फॉर्म जमा कराए गए।
इस दौरान मृत, पते से लापता और पूरी तरह स्थान छोड़ चुके 3 लाख 99 हजार 118 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। वहीं, 1 लाख 2 हजार मतदाताओं को सी कैटेगरी में रखा गया। इन मतदाताओं द्वारा स्वयं या अपने माता-पिता के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका था। इन्हें नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई, जो अब भी जारी है। वर्तमान में 15 से 20 प्रतिशत मामलों की सुनवाई शेष है, जो फरवरी तक पूरी किए जाने की संभावना है।
4.16 लाख मतदाताओं को नोटिस की तैयारी
इसके अलावा 4 लाख 16 हजार 111 मतदाताओं को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इनमें या तो पिता का नाम गलत दर्ज है या उम्र से संबंधित अंतर अस्वाभाविक पाया गया है। आंकड़ों के अनुसार 57 हजार से अधिक रिकॉर्ड में माता-पिता और मतदाता की उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम दर्ज है, जबकि 18 हजार से अधिक मामलों में यह अंतर 50 वर्ष से अधिक पाया गया है। इन सभी मामलों में भी सुनवाई होनी है, लेकिन उच्च स्तर से आदेश नहीं मिलने के कारण अब तक नोटिस प्रिंट नहीं किए जा सके हैं।
मानदेय बढ़ने से बीएलओ और सुपरवाइजर को राहत
इस बीच बीएलओ और सुपरवाइजरों को मानदेय बढ़ाकर कुछ राहत दी गई है। बीएलओ को अब वार्षिक 12 हजार रुपए (पूर्व में 5 हजार रुपए) और सुपरवाइजर को 18 हजार रुपए (पूर्व में 12 हजार रुपए) मानदेय मिलेगा। पहली बार सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को 30 हजार रुपए और अतिरिक्त सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को 25 हजार रुपए मानदेय देने की तैयारी की गई है। वहीं, अभिहित अधिकारी को प्रतिदिन 900 से 1000 रुपए के हिसाब से मानदेय दिया जाएगा।
