पुरातन काल से ही भारतीय भाषाओं के मध्य सह अस्तित्व का भाव- डॉ संजय अनंत

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक , समीक्षक डॉ. संजय अनंत ने शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय भारतीय भाषा परिवार के राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि पुरातन काल से ही भारतीय भाषाओं के मध्य सह अस्तित्व और समन्वय का भाव रहा है। भारत की सभी भाषा समृद्ध और अपने आप में परिपूर्ण है। सभी भारतीय अपनी मातृभाषा के अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा सीखे।


उद्घाटन सत्र में अटल बिहारी बाजपेयी यूनिवर्सिटी के कुलपति
प्रो ए डी एन बाजपेयी जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सावित्री त्रिपाठी द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया गया ।
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में लिंग्विस्ट रिसर्च यूनिट कोलकाता से प्रो. नीलाद्री शेखर दश, डॉ स्वाति चांदोलकर नरसिंहपुर एम पी से , रायपुर से वरिष्ठ प्रो. चितरंजन कर जैसे प्रतिष्ठित भाषाविद उपस्थित रहे । बिलासपुर से प्रो गुलशन दास , वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक शर्मा जी भी उपस्थित रहे
भारतीय भाषाओं में कैसे सामंजस्य बढ़े , कैसे सभी भारतीय भाषाएं समृद्ध हो , यह विद्वत जनों के चिंतन का प्रमुख विषय रहा । इस सेमिनार में चिंतन और वार्तालाप से निकले सुझाव केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय को प्रेषित किए जाएंगे

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