

बिलासपुर। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को देशभर में बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर रहे। लगातार तीन दिन की छुट्टी के बाद चौथे दिन भी बैंक बंद रहने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर हुई इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बिलासपुर जिले में करीब दो हजार सरकारी बैंक कर्मचारी शामिल हुए।
हड़ताल के चलते शहर और ग्रामीण अंचलों की सभी सरकारी बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद रहीं। नकद लेन-देन, चेक क्लीयरेंस, जमा-निकासी, पेंशन भुगतान और व्यापारिक लेन-देन जैसे कार्य पूरी तरह ठप रहे। बैंक बंद होने के कारण लोग शाखाओं के बाहर ताला देखकर वापस लौटते नजर आए। एटीएम और सीडीएम मशीनें भी अधिकांश स्थानों पर बंद रहीं या उनमें नकदी नहीं डाली गई, जिससे ग्राहकों को गंभीर असुविधा हुई।
हड़ताल के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि हड़ताल से पूर्व धरना-प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन किए गए, लेकिन सरकार द्वारा लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
यूनियन नेताओं ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक में पहले से ही पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू है, जबकि सरकारी बैंकों में स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। एक कर्मचारी को दो से तीन कर्मचारियों के बराबर काम करना पड़ रहा है, जिससे कार्यदबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
बैंक अधिकारी संघ के पदाधिकारियों—उप महासचिव हेमराम, अध्यक्ष राजेंद्र कुमार साहू, सहायक महासचिव विमल कुमार, वित्त सचिव वीरेंद्र सिंह और संगठन सचिव कपिल मानिक ने कहा कि यह आंदोलन केवल वर्तमान कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के हितों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक कार्यभार से कर्मचारियों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
वहीं उप महासचिव अधिकारी संघ दामोदर हेमराम ने बताया कि हड़ताल में शामिल सभी कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा। उन्होंने अनुमान जताया कि हड़ताल के कारण बिलासपुर जिले में लगभग 400 करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ है।
हालांकि, बैंक बंद रहने से आम उपभोक्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिली। ग्राहकों का कहना था कि निजी क्षेत्र में सप्ताह में छह दिन काम होता है, इसके बावजूद सेवाएं सुचारु रहती हैं, जबकि सरकारी बैंकों की हड़ताल से आम लोगों को बार-बार परेशानी झेलनी पड़ रही है।
